खुशियों की दास्तां, स्वसहायता समूह से जुड़कर आशा की आय बढ़ी और सम्मान भी मिला

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अनोखा तीर, हरदा। ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर हरदा जिले की महिलाएं आत्म निर्भर हो रहीं है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति तो सुधर ही रही है। साथ ही समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है। इन्हीं में से एक है, हंडिया निवासी श्रीमती आशा केवट। पहले इनके परिवार का पालन पोषण नर्मदा नदी में से मछली पकड़कर उन्हें बेचने से प्राप्त आय से चलता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। गांव में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वसहायता समूह गठन का कार्य लगभग 5 वर्ष पूर्व शुरू हुआ तो आशा ने भी समूह से जुड़कर आत्म निर्भर होने की ठान ली। कुछ ही दिन में रेवा आजीविका स्वसहायता समूह की महिलाओं ने आशा को अध्यक्ष के रूप में चुन लिया। आशा ने पहले सिलाई का कार्य शुरू किया फिर कुछ दिन बाद घर में ही अगरबत्ती निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आशा अपनी सास के साथ घर में ही अगरबत्ती बनाकर नर्मदा तट पर छोटी से दुकान लगाकर बेचने लगी। धीरे-धीरे आय बढ़ती गई अब आशा केवट हर महिने 10 हजार रूपये से अधिक कमाने लगी है। उसके समूह को गेहूं और मूंग उपार्जन का कार्य भी मिल गया, जिससे समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आय होने लगी। पिछले वर्ष आशा ने अपनी बढ़ी हुई आय से हंडिया गांव में ही साड़ी सेंटर और बच्चों के कपड़ों की दुकान भी खोल ली। अब आशा अपने परिवार का बहुत अच्छी तरह पालन पोषण कर रही है और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य उज्जवल बनाना चाहती है।

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