65 साल की उम्र में बाइक राइडिंग के शौक को चढ़ाया परवान, दस राज्यों का अकेले कर चुके भ्रमण

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भोपाल। 65 साल की उम्र में लोग अस्पताल के चक्कर काटने लगते हैं, लेकिन शहर के राकेश बैस के भीतर इस उम्र में भी युवाओं सरीखा जोश और जुनून बरकरार है। वह अकेले ही देश के कोने-कोने में बाइक से यात्रा कर रहे हैं, जिससे राज्यों की संस्कृति, सभ्यता और खान-पान से परिचित होते हैं। साथ ही लोगों को यातायात सुरक्षा का संदेश भी देते हैं। वह नेवी में कमांडर रहे और अब सेवानिवृत्त होकर सोलो साइड के शौक को जीते हैं। हाल में उन्होंने बाइक से भोपाल से मुंबई, वहां से गोवा होते हुए कर्नाटक की यात्रा की। फिर वहां से वापस इंदौर होते हुए भोपाल पहुंचे हैं। बाइक से 2914 किमी की इस यात्रा में उन्हें दस दिन का समय लगा।

नेवी से लिया था वीआरएस
नर्मदापुरम रोड निवासी राकेश बैस ने बताया कि मैंने शुरुआत में 1985 से लेकर 2001 तक खूब बाइक राइडिंग की। जिस जमाने में लोगों को कार खरीदने का शौक था, तब मुझे बाइक का शौक चढ़ा। इस दौरान दोस्तों के साथ कार से भी यात्रा करता था। फिर किसी कारणवश 2018 तक राइड करना बंद कर दिया था। एक साल बाद मैंने नेवी से वीआरएस ले लिया। इसके बाद पूरी तरह से सोलो राइड करने लगा। मेरे पास पहले दो बाइक थी, लेकिन अभी रायल एनफील्ड की सुपर मेट्योर 650 बाइक से ही यात्रा करता हूं। राकेश बैस के दो बेटे हैं। एक बेटा न्यूजीलैंड में नौकरी करता है तो दूसरा बेटा मुंबई से पढ़ाई कर रहा है।
हाइवे पर स्पीड ब्रेकर की संख्या ज्यादा है
वह अपने यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताते हैं कि स्थानीय दुकानदारों ने अपनी मनमानी के चलते राजमार्गों पर जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बना दिए हैं, जिनकी संख्या बहुत ज्यादा है। कई जगह स्पीड ब्रेकर भी स्टैंडर्ड साइज के नहीं है। कई बार यह दुर्घटनाओं का कारण तक बन रहे हैं। राकेश बताते हैं कि अब वह भोपाल से लद्दाख की यात्रा पर जाने वाले हैं। अभी तक वह अकेले दस राज्यों का भ्रमण कर चुके हैं।

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