मालवा-निमाड़। अजगर की भांति खुले बोरवेल आए दिन बच्चों की जान ले रहे हैं। बावजूद जिम्मेदारों द्वारा इस पर रोकथाम के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। आलीराजपुर जिले में बोरवेल में गिरे पांच वर्षीय विजय को रेस्क्यू अभियान के बावजूद जीवित नहीं निकाला जा सका। मासूम विजय बोरवेल में गिरकर 20 फीट की गहराई में फंस गया था। ऐसे में एक बार यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर लगातार घटनाओं के बाद भी लोग सबक क्यों नहीं ले रहे। क्यों प्रशासन हर बार हादसा होने के बाद ही इसे लेकर सक्रियता दिखाता है।
हादसे के बाद उठे सवाल
आलीराजपुर जिले के ग्राम खंडाला में बोरिंग करीब 250 फीट गहरा है। ऊपर से 20 फीट में ही चौड़ाई करीब 10 इंच थी। ऐसे में विजय 20 फीट गहराई में जाकर फंस गया था। प्रशासन ने रेस्क्यू में तत्परता तो दिखाई, मगर क्या पहले ही एहतियातन कदम नहीं उठाए जा सकते थे। देश-प्रदेश में जब भी ऐसा कोई हादसा पेश आता है तो सरकारी मशीनरी कागजी आदेश की औपचारिकता पूरी कर देती है। यही कारण है कि बच्चों की जानों को लीलने वाले बोर हर कहीं बने रहते हैं। बताया जाता है कि जिले में दर्जनों स्थानों पर ऐसे बोर मौजूद हैं, जो कभी-भी गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं।
एफआइआर दर्ज की जा रही
विजय की मौत जिस बोरवेल में गिरने से हुई है, वह खंडाला के डावरिया फलिया में उसके मौसा सालम के खेत में है। बोर खुला छोड़कर गंभीर लापरवाही बरतने पर सालम के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा रही है।
सभी खुले बोर 15 दिन में बंद करने के आदेश
जिला प्रशासन ने हादसे के बाद सबक लिया है। सभी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ को आदेश जारी किया गया है कि 15 दिन के भीतर जिले में सभी खुले बोर बंद कराए जाएं। तय अवधि में कार्य पूर्णता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
धार जिले में भी यह हाल
धार जिले में बदनावर, टवलाई व काली बावड़ी के साथ अन्य स्थानों पर बोरवेल खुल पड़े हैं। रतलाम जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में खुले बोरवेल की संख्या अधिक है। ऐसे खुले बोरवले बंद कराने के लिए गत वर्ष जिला व पुलिस प्रशासन ने अभियान चलाया था। फिर से कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। शहरी क्षेत्र में छह इंची बोरवेल होने से हादसे की आशंका नहीं रहती है, लेकिन खेत में बड़े बोरवेल फेल होने पर खुले छोड़े जा रहे हैं।
खरगोन शहर में भी
खरगोन शहर में दो बोरवेल बिना सुरक्षा के हैं। एक बस स्टैंड क्षेत्र और दूसरा कालोनी में खुले प्लाट पर है। यहां बोरवेल में लोहे के ढक्कन लगा है, लेकिन वह खुल भी सकता है। आसपास बच्चे खेलते हैं। देवास जिले के खातेगांव क्षेत्र में सन्नी नामक बालक खुले बोरवेल में गिरा था। मशक्कत के बाद उसे बचा लिया गया था। इसके बाद जिलेभर में खुले बोरिंग बंद करवाने पर कार्रवाई की गई थी। इधर कुछ जगह खेत में खुले केसिंग लगे हैं।
सड़क किनारे खुला छोड़ दिया बोरवेल
बुरहानपुर शहर से लगे मोहम्मदपुरा पंचायत में एप्पल हास्पिटल के पाए सड़क किनारे खोदा गया एक बोरवेल का गड्ढा खुला छोड़ दिया गया है। बताया जाता है कि यह बोरवेल पीएचई विभाग ने खुदवाया था। अस्पताल में मरीजों के साथ बच्चे भी आते हैं। किसी भी समय कोई घटना हो सकती है।
Views Today: 4
Total Views: 324

