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Thursday, 29 October 2026
भोपाल मध्य प्रदेश

संघ के स्वयंसेवक डा. मोहन यादव मप्र के नए मुख्यमंत्री, 18 वर्ष बाद भाजपा में नई पीढ़ी संभालेगी सरकार

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भोपाल। सिर्फ चुनावी जमावट ही नहीं बल्कि सत्ता की बुनावट में भी भाजपा के रणनीतिकारों का कोई जवाब नहीं है। भाजपा ने जिस ठोस तैयारी के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की वही अक्स सत्ता में दिखाई पड़ रहा है। हर वर्ग को साधते हुए भाजपा ने मध्य प्रदेश से ही देश को लोकसभा के नजरिये से संदेश दे दिया है, जिसमें रहिमन की यह पंक्तियां ध्वनित हैं –

एक दिशा से सभी वर्गों को साधते हुए भाजपा ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री पद ओबीसी के खाते में ही है, तो राज्यपाल (मंगुभाई पटेल) पहले से ही आदिवासी वर्ग से हैं। दो उप मुख्यमंत्रियों को चुनते समय एससी (जगदीश देवड़ा) और सामान्य वर्ग (राजेंद्र शुक्ल) का ध्यान रखा गया है।

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर क्षत्रिय वर्ग से हैं, तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर पहले से ब्राह्मण (विष्णु दत्त शर्मा) हैं। सोशल इंजीनियरिंग के माहिरों ने मध्य प्रदेश की जो तस्वीर बनाई है, वह देश में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। जिस तरह मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव को लोकसभा के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा था, उसी गंभीरता से भाजपा ने इसे पूरी जीवटता से लड़ा। जीत के बाद सत्ता की बुनावट भी उसी आधार पर की है, जिससे कई राज्यों को सीधा संदेश जा रहा है।

मनोनीत मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के तौर पर भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और बिहार में तेजस्वी यादव के सामने इस वर्ग से ऐसा बड़ा चेहरा उतार दिया है, जो इन नेताओं के दलों के यादव वर्ग का मसीहा होने का भ्रम तोड़ सकता है।

खास बात यह है कि अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव पहलवान थे और डा. मोहन यादव भी पहलवान होने के साथ मध्य प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। सियासी गलियारों में गुमनाम चेहरे के तौर पर मजबूत उपस्थिति रखने वाले डा. मोहन यादव की सफलता भी इस वर्ग को भाजपा के प्रति खासी आकर्षित करेगी। उनमें विनम्रता भी कूट-कूट कर भरी है।

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