नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उत्तरी चीन में एच9एन2 के मामलों और बच्चों में सांस की बीमारी वाले क्षेत्रों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। चीन में फैले एवियन इन्फ्लूएंजा के मामले के साथ-साथ सांस की बीमारी वाले क्षेत्रों से भारत को कम खतरा है।
वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के आधार पर, पिछले कुछ हफ्तों में चीन में श्वसन रोगों की घटनाओं में बढ़ोतरी की सूचना है। बच्चों में सांस संबंधी बीमारी के सामान्य कारण ही सामने आए है और असामान्य रोगज़नक़ या किसी भी अप्रत्याशित नैदानिक कारकों की कोई पहचान नहीं हुई है।
चीन में अक्टूबर 2023 में एच9एन2 मानव मामले की पृष्ठभूमि में देश में एवियन इन्फ्लूएंजा के मानव मामलों से बचने की तैयारी के उपायों पर चर्चा करने के लिए हाल ही में डीजीएचएस की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समग्र जोखिम मूल्यांकन से पता चलता है कि मानव से मानव में संक्रमण फैलने की संभावना कम है और डब्ल्यूएचओ को अब तक सूचित एच9एन2 के मानव मामलों में मृत्यु दर भी कम है। मानव, पशुपालन और वन्य जीव क्षेत्रों के बीच निगरानी को मजबूत करने और समन्वय में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया।
भारत किसी भी तरह की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। भारत इस तरह के सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों से निपटने की दिशा में एक समग्र और एकीकृत रोडमैप अपनाने के लिए एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण शुरू कर रहा है। विशेष रूप से कोविड महामारी के बाद से स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को भी काफी मजबूत किया गया है। पीएम-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन शुरुआत प्रधानमंत्री ने की थी, जो वर्तमान और भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने में स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयार करने के लिए प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक सभी स्तरों पर देखभाल की निरंतरता में स्वास्थ्य प्रणालियों और संस्थानों की क्षमताओं का विकास कर रहा है। इसके अलावा, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत भारत के निगरानी और पहचान नेटवर्क को कोविड-19 महामारी के दौरान चुनौतीपूर्ण स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने का समृद्ध अनुभव है।
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