आठनेर नगर से 5 किलोमीटर दूर मजरे घोघरा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर पंडित विनायक जी ने बताया कि संसार में अगर दोस्ती करना है तो सच्ची मित्रता कृष्ण और सुदामा से सीखना चाहिए सुदामा जी चाहे कितने गरीब हो और कृष्ण जी चाहे कितने भी बड़े राजा परंतु जब अपना मित्र अपने द्वार पर आया तो वे सुध बुध खो कर अपने मित्र से मिलने के लिए पैर में चप्पल ना पहनकर अपने मित्र को गले लगाने के लिए दौड़ पड़े ऐसी मित्रता आज होना चाहिए इस कलयुग में सच्चे मित्र मिलना बहुत कठिन हो गया है श्री विनायक जी ने बताया कि आज राजा परीक्षित का मोक्षका दिन है आज राजा परीक्षित को गंगा के तट पर सुखदेव भगवान द्वारा जो भागवत कथा सुनाई जा रही थी उसका आज अंतिम दिन एवं एवं राजा परीक्षित का मोक्ष उसी सर्प के काटने से होगा इस अवसर पर यजमान श्री बारस्कर जी द्वारा ग्राम एवं आसपास के सभी नाते दारो रिश्तेदारों को प्रसादी हेतु आमंत्रित किया था इस भंडारा प्रसादी का सभी ने श्रवण कर भागवत कथा का समापन किया गया



