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Friday, 6 November 2026
हरदा

दसलक्षण पर्व का आगाज, उत्तम क्षमा धर्म की आराधना में डूबा जैन समाज

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-चारों जिनालयों में अभिषेक, विधान-पूजन और धार्मिक आयोजन
-शाम को अर्हम ध्यान योग, भक्ताम्बर मंडल पाठ और भव्य आरती में उमड़े श्रद्धालु

अनोखा तीर, हरदा। जैन समाज के आत्मशुद्धि के पावन पर्व दशलक्षण पर्व की शुरुआत के साथ ही हरदा में धर्म और भक्ति का वातावरण बन गया है। दस धर्मों की आराधना के लिए प्रसिद्ध इस दस दिवसीय पर्व के प्रथम दिन 16 सितंबर 2026 को उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने जीवन में क्षमा, विनम्रता और आत्मसंयम को अपनाने का संकल्प लिया। पर्व के दौरान श्रद्धालु दस दिनों तक विभिन्न धर्मों की आराधना और धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन 16 सितंबर को हरदा नगर के चारों दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, विधान-पूजन, पाठ एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुईं। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। विशेष रूप से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रात:काल दशलक्षण महामंडल विधान का विधिवत पूजन-अर्चन एवं पाठ किया गया। श्री दिगंबर जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि पर्व के तहत मंदिर में दिनभर विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। शाम को अर्हम ध्यान योग पाठशाला का आयोजन किया गया। इसके साथ ही भक्ताम्बर मंडल पाठ और संध्याकालीन भव्य आरती हुई। आरती में समाज के बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। मंदिर परिसर देर शाम तक धार्मिक वातावरण से सराबोर रहा।
दस दिन धर्म आराधना में समर्पित रहेगा समाज
समाज अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व जैन समाज के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का अवसर है। इन दस दिनों में समाज के लोग पूर्ण मनोयोग और भक्तिभाव के साथ धर्म की आराधना करते हैं। मोह-माया और सांसारिक व्यस्तताओं से स्वयं को दूर रखते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तम क्षमा धर्म हमें क्रोध और वैमनस्य छोड़कर सभी जीवों के प्रति क्षमा एवं मैत्री का भाव रखने की प्रेरणा देता है। यही दशलक्षण पर्व का मूल संदेश है कि बाहरी आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण अपने भीतर के विकारों को दूर कर आत्मा की शुद्धि की ओर बढ़ना है।

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