पर्व में पूजा करें या पेपर दें

– स्कूलों के एग्जाम शेड्यूल पर जैन समाज ने जताई आपत्ति
-मुख्यमंत्री व कलेक्टर से मांगा स्थायी आदेश

अनोखा तीर, हरदा। जैन धर्म के दशलक्षण पर्युषण पर्व और हिन्दू धर्म के गणेशोत्सव के दौरान स्कूलों में परीक्षाएं नहीं कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। श्री दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन और सहसचिव संजय पाटनी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को पत्र भेजकर 15 से 25 सितंबर 2026 के बीच शासकीय, अर्द्धशासकीय, निजी और कान्वेंट स्कूलों में किसी भी प्रकार की परीक्षा नहीं रखने की मांग की है। समाज पदाधिकारियों ने पत्र में कहा कि परीक्षाओं और पढ़ाई के दबाव के कारण नई पीढ़ी धार्मिक, आध्यात्मिक और नैतिक संस्कारों से दूर होती जा रही है। ऐसे में दशलक्षण पर्व और गणेशोत्सव जैसे अवसर बच्चों को अपनी संस्कृति, धर्म और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि इन्हीं दिनों स्कूलों में परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं तो विद्यार्थी पर्व की धार्मिक गतिविधियों में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाएंगे।
निजी स्कूलों की ‘हठधर्मिताÓ पर सवाल
पत्र में निजी और कान्वेंट स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। समाज का कहना है कि स्कूल प्रबंधन परीक्षा का टाइमटेबल तय करते समय धार्मिक पर्वों और विद्यार्थियों की सामाजिक- सांस्कृतिक जरूरतों को भी ध्यान में रखें। केवल अकादमिक कैलेंडर पूरा करने की जल्दबाजी में बच्चों को धार्मिक आयोजनों से दूर करना उचित नहीं है। समाज पदाधिकारियों ने यह भी तर्क दिया कि पर्व के दौरान कई स्थानों पर धार्मिक आयोजन, जुलूस, पंडाल, माइकों और अन्य कार्यक्रमों के कारण वातावरण में शोर रहता है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी होती है। इसलिए परीक्षाओं की तारीख पर्व से पहले या उसके बाद निर्धारित की जाए।
केवल 2026 नहीं, हर साल के लिए स्थायी निर्देश की मांग
जैन समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 2026 में ही नहीं, बल्कि आगामी वर्षों के लिए भी स्थायी निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तक के 11 दिनों में स्कूल परीक्षाओं का आयोजन न करें। समाज ने राज्य शासन के स्कूली शिक्षा विभाग से सीबीएसई, आईसीएसई, माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित सभी बोर्डों से संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों एवं प्रबंधन, जिला शिक्षा अधिकारियों और जिलों के कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
‘संस्कार भी जरूरी, सिर्फ नंबर नहींÓ
समाज पदाधिकारियों का कहना है कि बच्चों का भविष्य केवल परीक्षा और अंकों से नहीं बनता, बल्कि संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना भी उनके व्यक्तित्व निर्माण का अहम हिस्सा हैं। इसलिए स्कूलों के वार्षिक एजुकेशन कैलेंडर और परीक्षा शेड्यूल बनाते समय प्रमुख धार्मिक पर्वों को ध्यान में रखना चाहिए। पत्र के अंत में समाज ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा है कि इससे जैन एवं हिन्दू समाज की भावनाओं का सम्मान होगा और बच्चों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

0 Views

Leave a Reply