
बलवीर सिंह खत्री, हंडिया। नर्मदा नदी के किनारे बसा हंडिया धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आज भी मुगलकालीन स्थापत्य और पुराने निर्माणों के अवशेष इतिहास की गवाही देते नजर आते हैं। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में मुगलकालीन तेली की सराय का विशेष महत्व माना जाता है। पुराने समय में हंडिया महत्वपूर्ण आवागमन और व्यापारिक मार्ग से जुड़ा हुआ था। दूर-दराज से आने वाले यात्रियों एवं व्यापारियों के ठहरने के लिए सरायों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। तेली की सराय भी इसी ऐतिहासिक दौर की एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में देखी जाती है। सराय की पुरानी वास्तुकला उस समय की निर्माण शैली और स्थापत्य कला की झलक प्रस्तुत करती है। समय के साथ देखरेख के अभाव में ऐतिहासिक इमारतों की स्थिति प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी धरोहरों का संरक्षण किया जाए तो हंडिया के इतिहास और पर्यटन को नई पहचान मिल सकती है।
ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की जरूरत
हंडिया की तेली की सराय केवल एक पुराना भवन नहीं, बल्कि क्षेत्र के गौरवशाली अतीत से जुड़ी निशानी है। इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों की मांग है कि प्रशासन द्वारा इस धरोहर का सर्वेक्षण, संरक्षण और सौंदर्यीकरण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी हंडिया के इतिहास को करीब से जान सकें।





