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Friday, 9 October 2026
हरदा

टोकन बुक किया, फिर भी नहीं मिली खाद

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-40 किमी दूर किराए का पिकअप लेकर पहुंचा किसान

तरुण गौर, सिराली। खाद के लिए ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था किसानों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। ग्राम क्षेत्र के एक किसान ने खाद के लिए ऑनलाइन टोकन बुक किया। टोकन में जिस दुकान का नाम आया, वहां खाद लेने के लिए किसान करीब 40 किलोमीटर दूर किराए का पिकअप वाहन लेकर पहुंच गया। लेकिन दुकान पर पहुंचने के बाद पता चला कि वहां महीनों से खाद ही नहीं पहुंची है। ऐसे में किसान को खाली हाथ और किराए के वाहन का खर्च उठाकर वापस लौटना पड़ा।
टोकन मिला, दुकान मिली… खाद नहीं मिली
किसान का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में टोकन बुक करते समय उसे संबंधित दुकान आवंटित की गई थी। टोकन के भरोसे उसने किराए पर पिकअप वाहन किया और करीब 40 किमी का सफर तय कर दुकान पहुंचा। किसान को उम्मीद थी कि टोकन के आधार पर खाद मिल जाएगी और वह खाद लेकर वापस लौटेगा। लेकिन दुकान पर पहुंचने के बाद खाद उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिली। किसान के अनुसार जिस दुकान का टोकन बुक हुआ था, वहां कई महीनों से खाद की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके बावजूद ऑनलाइन व्यवस्था में उसी दुकान का टोकन किसान को मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
किसान का सवाल- जब खाद नहीं तो टोकन क्यों?
किसान का कहना है कि खाद उपलब्ध नहीं होने वाली दुकान के लिए टोकन जारी होने से किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। दूर-दराज से किसान किराए के वाहन लेकर खाद लेने पहुंचते हैं। दुकान पर खाद नहीं मिलने के बाद उन्हें खाली लौटना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संबंधित दुकान पर महीनों से खाद नहीं पहुंची तो ऑनलाइन पोर्टल पर उस दुकान के लिए टोकन बुक कैसे हो रहा है? क्या पोर्टल पर दुकानों का वास्तविक स्टॉक अपडेट नहीं किया जा रहा या फिर विभाग और दुकानों के बीच समन्वय की कमी है?
दुकानदार बोला- ऑनलाइन पोर्टल की खामी
मामले में दुकानदार ने किसानों को खाद नहीं मिलने के पीछे ऑनलाइन पोर्टल की खामी को कारण बताया। यदि पोर्टल पर स्टॉक और उपलब्धता की जानकारी सही तरीके से अपडेट नहीं है तो इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
डीडीए ने कहा- किसानों से फोन पर हुई बात
मामले की जानकारी कृषि विभाग के डीडीए प्रकाश ठाकुर को दी गई। उन्होंने बताया कि किसानों से फोन पर बात हुई है। पोर्टल से संबंधित समस्या की जानकारी सामने आई है। विभाग स्तर पर मामले को देखा जा रहा है।
व्यवस्था पर बड़ा सवाल
ऑनलाइन टोकन व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को खाद के लिए अनावश्यक भटकने से बचाना है। लेकिन जब टोकन लेकर किसान 40 किलोमीटर दूर पहुंचे और वहां खाद ही उपलब्ध नहीं मिली, तो व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। किसान का कहना है कि खाद की जरूरत फसल को समय पर होती है। ऐसे में टोकन, किराए का वाहन और लंबा सफर करने के बाद भी यदि खाद नहीं मिले तो ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए सुविधा है या परेशानी, इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।

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