पश्चिमी सभ्यता के परिवेश में देश के कायाकल्प में स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प  

 


-विश्वउद्यमिता दिवस पर ग्राम नकवाड़ा में आयोजित हुआ स्वदेशी जागरण मंच का कार्यक्रम
अनोखा तीर, हरदा। भारत ने अपनी  मुगलों अंग्रेजों की दास्तां के समय अपनी गौरवशाली संस्कृति तथा समृद्धि को छिन्न-भिन्न होते देखा है। आज का युवा दिन प्रतिदिन पश्चिमी सभ्यता एवं संस्कृति में अपने भारतीय स्वरूप को खोता जा रहा है। इस प्रकार स्वदेशी भाषा, वेश-भूषा तथा दैनिक जीवन में विदेशी वस्तुओं का प्रयोग कर अपनी  स्वदेशी शैली तथा वस्तुओं का त्याग कर अपने ही आने वाले कल के प्रति संकट पैदा कर रहा है। तब ऐसी परिस्थिति में स्वदेशी का भाव ही देश की कायाकल्प करने का सशक्त माध्यम है। उक्त विचार विश्व उद्यमिता दिवस पर ग्राम नकवाड़ा में रेड फ्लावर हायर सेकंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में  डॉ. एलएन पाराशर द्वारा व्यक्त किए। उन्होंने अपने उदबोधन में कहा किसी भी देश को यदि आर्थिक, सामाजिक तकनीकी सुरक्षा आदि से समर्थ एवं महाशक्ति बनाना है तो स्वदेशी मंत्र को ही अपनाना होगा, इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। आर्थिक रूप से सक्षम तथा स्वावलंबी भारत के इस अभियान में उद्यमिता दिवस पर प्रांतीय अधिकारी रविलाल पटेल तथा विभागीय दायित्व का निर्वहन कर रहे नरेन्द्र राठी ने भी संबोधित किया। अतिथि वक्ताओं द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि अपने देश की बनी वस्तुओं के उपयोग से देश में रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा नवीन उद्योगों का सृजन होगा जिससे देश का पैसा देश में रहेगा और हम आर्थिक रूप से सक्षम हो सकेंगे। उद्यमिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्राम की अपने छोटे से कारोबार पत्तल दोना निर्माण कर न केवल हरदा अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश में गांव में निर्मित सामाग्री का विक्रय करने वाले उद्यमी महेश कुशवाहा को सम्मानित भी किया। साथ ही ग्राम नकवाड़ा में ही बहुत ही बेहतर ढंग से ग्रामीण बच्चों को शिक्षा तथा संस्कार देने हेतु संचालक शिवनारायण शर्मा को भी स्वदेशी जागरण मंच हरदा द्वारा सम्मानित किया गया।  कार्यक्रम का संचालन तथा विषय की पृष्ठभूमि सत्यनारायण दोगने द्वारा रखी गई। कार्यक्रम के अंत में स्वदेशी का संकल्प उपस्थित शाला परिवार अतिथि एवं बच्चों के लिए संस्था के प्राचार्य शिवनारायण शर्मा द्वारा दिलाया गया।

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