-युवा नेत्रियों के सपनों, संघर्षों और उपलब्धियों का उत्सव
अनोखा तीर, हरदा। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सिनर्जी संस्थान द्वारा संचालित उड़ान फेलोशिप जड़ों को मज़बूत करना और पंखों को फैलाना के अंतर्गत बैच-9 की दो वर्षीय फेलोशिप यात्रा के समापन एवं बैच-10 के दूसरे वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में उड़ान फेलोशिप जश्न-ए-यात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पैनल चर्चा रही। इसका विषय था लड़कियों को अपने सपने पूरे करने में परिवार और समाज किस तरह सहयोग कर सकता है? चर्चा में अरुणा सिंह, सिराली में परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली युवती की माता मीना जी, अपनी बेटी के सपनों को प्रोत्साहित करने वाले दिनेश जी, एलुमनाई फेलो सोनम खटनाकर, बैच-9 की फेलो सपना चौहान तथा सिनर्जी संस्थान की कार्यकर्ता शिवानी शामिल हुईं। शिवानी ने मॉडरेटर की भूमिका निभाते हुए चर्चा को आगे बढ़ाया। पैनल चर्चा में शिक्षा, करियर और सपनों की दिशा में लड़कियों को आगे बढ़ाने में परिवार की भूमिका, अवसरों की उपलब्धता, सामाजिक सोच और निरंतर प्रोत्साहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अनुभव साझा किए गए। चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि जब परिवार बेटियों के सपनों पर विश्वास करता है और उन्हें अपने निर्णय लेने तथा आगे बढ़ने के अवसर देता है, तो वे अपनी क्षमताओं को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान उड़ान की युवा नेत्रियों ने मंच पर अपनी दो वर्षों की यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उड़ान कार्यक्रम के दौरान उन्होंने क्या सीखा, उनके अनुभवों ने उनके व्यक्तित्व और सोच में किस तरह बदलाव लाया तथा आज वे अपने भविष्य को किस रूप में देख रही हैं। फेलोज़ ने अपने सपनों, चुनौतियों, संघर्षों और उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि कार्यक्रम ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने, अपनी पहचान बनाने और अपने भविष्य से जुड़े निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। विजिबिलिटी इवेंट के माध्यम से युवा नेत्रियों की कहानियों, अनुभवों और उपलब्धियों को एक मंच मिला। यह आयोजन केवल उनकी दो वर्षों की यात्रा का उत्सव नहीं था, बल्कि उनके सपनों और नेतृत्व क्षमता को समाज के सामने लाने का एक प्रयास भी रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य लड़कियों की क्षमता, नेतृत्व, सपनों और आवाज़ को दृश्यता प्रदान करना, उनके लिए सहयोगी और अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा परिवार और समाज में बेटियों के सपनों को लेकर सकारात्मक संवाद को मजबूत करना रहा।



