अनोखा तीर, हरदा। कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा के वरिष्ठ तकनीकी पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को फसल संरक्षण संबंधी उपयोगी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इस समय सोयाबीन की फसल में तना मक्खी एवं सफेद मक्खी का प्रकोप देखा जा रहा है। इसके नियंत्रण के लिए लक्षण दिखाई देने पर बाजार में उपलब्ध पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायमेथोक्साम 12.60 प्रतिशत लेम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेडसी 50 मिली प्रति एकड़ अथवा बीटा सायफ्लूथ्रिन इमिडाक्लोप्रिड 140 मिली प्रति एकड़ या आइसोसाइक्लोसरम 9.2 डब्ल्यू/डब्ल्यू डीसी 240 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण के लिए क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी 60 मिली प्रति एकड़ अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 1.90 प्रतिशत 170 मिली प्रति एकड़ या फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजी 100 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करें। पीला मोजेक रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में ही रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर नष्ट कर दें। डॉ. बंकोलिया ने किसानों को सलाह दी कि सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए खेत में विभिन्न स्थानों पर पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं। साथ ही सफेद मक्खी एवं एफिड जैसे वाहक कीटों के नियंत्रण के लिए थायमेथोक्साम 12.60 प्रतिशत + लेम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत जेडसी 50 मिली प्रति एकड़ अथवा बीटा सायफ्लूथ्रिन इमिडाक्लोप्रिड 140 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करें। इससे तना मक्खी का भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन में कॉलर रॉट अथवा राइजोक्टोनिया जड़ सड़न रोग के लक्षण दिखाई देने पर टेबुकोनाजोल सल्फर 400 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करें। डॉ. बंकोलिया ने किसानों को सलाह दी कि पौध संरक्षण के लिए अनुशंसित खरपतवारनाशी, कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का छिड़काव करते समय पावर पंप से प्रति एकड़ 100 से 120 लीटर पानी का उपयोग करें। किसी भी कृषि आदान की खरीद करते समय दुकानदार से पक्का बिल अवश्य लें, जिस पर बैच नंबर एवं एक्सपायरी तिथि स्पष्ट अंकित हो। उन्होंने यह भी सलाह दी कि जिन रसायनों के मिश्रित उपयोग की वैज्ञानिक अनुशंसा या पूर्व अनुभव नहीं है, उनका मिश्रण कदापि उपयोग न करें, क्योंकि इससे फसल को नुकसान हो सकता है।
कृषि वैज्ञानिक ने सोयाबीन किसानों को फसल संरक्षण की दी सलाह

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