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Thursday, 22 October 2026
हरदा

आठ दिन से थमा मानसून, खरीफ फसलों पर मंडराया संकट

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अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। 6 जुलाई को हुई बारिश के बाद से एक बूंद पानी नहीं गिरा है, जिससे खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार रुक जाएगी और उत्पादन प्रभावित होगा। समय पर हुई शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने सोयाबीन, मक्का, धान, उड़द सहित अन्य खरीफ फसलों की लगभग पूरी बुवाई कर दी थी। शुरुआती वर्षा से अंकुरण भी अच्छा हुआ, लेकिन लंबे अंतराल के कारण खेतों की नमी खत्म होने लगी है। कई स्थानों पर पौधों की पत्तियां पीली पड़ रही हैं और हल्की मिट्टी वाले खेतों में पौधों के मुरझाने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे बीज, खाद, डीजल और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। क्षेत्र में अल नीनो के प्रभाव की भी चर्चा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से तालाब, नदी-नाले और अन्य जलस्रोत पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। जलाशयों का जलस्तर सामान्य से कम है और भूजल स्तर में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। किसान कीर्तन रायखेरे, वासु पाटिल और पवन पाटिल ने बताया कि आषाढ़ का महीना खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान पर्याप्त वर्षा मिलने से फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। धान और मक्का जैसी फसलें लगातार नमी पर अधिक निर्भर रहती हैं, इसलिए बारिश में लंबे अंतराल से पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सूखे जैसे हालात बने रहे तो सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। समय पर वर्षा नहीं होने से पौधों की जड़ों का विकास कमजोर रहेगा और बाद में अधिक बारिश होने पर भी अपेक्षित उत्पादन मिलना कठिन होगा।
उमस और गर्मी से बढ़ा रोग व कीटों का प्रकोप
बारिश नहीं होने से क्षेत्र में उमस और गर्मी बनी हुई है। इसका असर सोयाबीन की फसल पर दिखाई देने लगा है। कई खेतों में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है और पत्तियों पर रोग के लक्षण भी नजर आने लगे हैं। किसानों ने खरपतवार नियंत्रण के लिए पहले ही दवाओं का छिड़काव किया था, लेकिन लगातार उमस के कारण कीट और रोग तेजी से फैल रहे हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों को कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नियमित रूप से फसलों का निरीक्षण करने तथा आवश्यकता अनुसार कृषि विभाग की सलाह से दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी है। किसानों की निगाहें अब अच्छी बारिश पर टिकी हैं। उनका कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ फसलों को भारी नुकसान हो सकता है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और जिले के कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

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