अनोखा तीर, हरदा। कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा के पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया ने किसानों को सलाह दी है कि फसल की प्रारंभिक अवस्था में रोग एवं कीटों से बचाव तथा उपयुक्त पौध संख्या सुनिश्चित करने के लिए बीजोपचार अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एफआईआर विधि अपनाते हुए फफूंदनाशक, कीटनाशक एवं जैविक कल्चर का सही क्रम में उपयोग किया जाए। उन्होंने बताया कि बीजोपचार के लिए सबसे पहले अनुशंसित पूर्व मिश्रित फफूंदनाशक एजॉक्सीस्ट्रोबिन 2.5 प्रतिशत, थायोफीनेट मिथाइल 11.25 प्रतिशत तथा थायमेथोक्साम 25 प्रतिशत एफएस की 10 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार किया जाए। इसके बाद राइजोबियम कल्चर मिलाया जाए। बुवाई से पूर्व बीज का अंकुरण प्रतिशत अवश्य जांच लेना चाहिए। डॉ. बंकोलिया ने कहा कि अल नीनो, सूखा, अतिवृष्टि अथवा असामयिक वर्षा जैसी विपरीत मौसमीय परिस्थितियों में फसल सुरक्षा के लिए सोयाबीन की बुवाई बीबीएफ (चौड़ी क्यारी प्रणाली), रिज-फरो पद्धति एवं रेज्ड बेड पद्धति से करना लाभकारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के उपयोग से खेतों में जल निकास बेहतर होता है तथा फसल को प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने में सहायता मिलती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा की कृषकों को सलाह

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