लोकभाषा और काव्य रस से सराबोर हुई साहित्य गोष्ठी

अनोखा तीर, हरदा। अकड़ी न मत रओ रे, बोलो मुस्काओ, नई तो लोग जलई देगा, थोड़ा नवी जाओ…  भुआणी बोली के इस गीत ने रविवार 21 जून को रुपई एग्रीफॉरेस्ट लिमिटेड, हरदा कार्यालय में आयोजित साहित्य गोष्ठी को लोकभाषा के रस और माधुर्य से सराबोर कर दिया। मध्य प्रदेश लेखक संघ जिला इकाई हरदा द्वारा आयोजित इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध गजलकार मंसूर अली मंसूर, सारस्वत अतिथि के रूप में ओज कवि नरेंद्र वर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में खातेगांव से पधारे राष्ट्रभक्त कवि मनमोहन व्यास उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इकाई अध्यक्ष सुभाष सिटोके ने की। संस्था के वरिष्ठ संरक्षक गौरीशंकर मुकाती एवं प्रोफेसर प्रभुशंकर शुक्ल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सचिव त्रिलोक शर्मा ने किया तथा सरस्वती वंदना सुभाष सिटोके द्वारा प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात रतन सिंह सोलंकी ने झुलस रहा तन बदन धरा का, मेघ नहीं क्यों बरस रहे, बालमुकुंद ओझा ने शारदे मां शारदे, सतीष कपोले ने खारे पानी का सफर है, खानपान साथ रखना, बृजमोहन अग्रवाल ने बाद मरने के सारी खूबियां गिनाते हैं, नरेंद्र वर्मा ने मिलन सारिता ऐसी जो कर देती भाव-विभोर है तथा शिरीष अग्रवाल ने बोल इश्क़ का बुलावा दे दूं, लाल रंग का पहनावा दे दूं रचनाएं प्रस्तुत कीं। मनमोहन व्यास ने कह दो सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है, जयकृष्ण चांडक ने किया है जो तुमने वो भरना पड़ेगा, बालकवि दुहित गौर ने हमारे राम की पूजा जगत यूं ही नहीं करता, सावन सिटोके ने नेह पिता का भिगो रहा बन पावस शुष्क महीने में तथा मंसूर अली ने वो जो छत पर अगर नहीं आता, चांद सबको नज़र नहीं आता प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। लोमेश गौर, मदन व्यास, सुभाष सिटोके, गौरीशंकर मुकाती, गोविंदराम हाशाणी, त्रिलोक शर्मा तथा प्रभुशंकर शुक्ल ने भी अपनी रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम के दौरान जन्मदिन के अवसर पर शिरीष अग्रवाल तथा संस्था में प्रथम बार पधारे मनमोहन व्यास का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। स्वल्पाहार एवं आभार प्रदर्शन के उपरांत कार्यक्रम का समापन हुआ।

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