अनोखा तीर, हरदा। विगत 27 वर्षों से रंगकर्म के क्षेत्र में कार्यरत जिले की एकमात्र संस्था इनटेलेक्चुअल पब्लिक वेलफेयर एंड ट्रेनिंग फॉर आर्ट सोसायटी द्वारा मणि मधुकर की रचना ‘दुलारी बाईÓ का मंचन संजय तेनगुरिया के निर्देशन में स्थानीय एलबीएस कॉलेज के सभागार में किया गया। लोक कला की रंगत और कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने दर्शकों को लगभग दो घंटे तक बांधे रखा। नाटक की कहानी गांव की एक कंजूस और लालची महिला दुलारी बाई के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सुंदर होने के साथ-साथ अत्यंत संपन्न भी है। उसकी संपत्ति के लालच में गांव के कई लोग उससे विवाह करने के लिए प्रयास करते हैं। इसी दौरान दुलारी के १०० वर्ष पुराने जूते कहानी के केंद्र में आ जाते हैं, जिनसे वह छुटकारा पाना चाहती है, लेकिन वे बार-बार उसके पास लौट आते हैं। कल्लू भांड दुलारी के लालची स्वभाव को समझकर राजा का वेश धारण करता है और छलपूर्वक उससे विवाह कर लेता है। नाटक के अंत में एक लोककथा के माध्यम से दुलारी को स्वप्न में ईश्वर से यह वरदान मिलता है कि वह जिस वस्तु को छुएगी, वह सोने की हो जाएगी। शीघ्र ही उसे यह एहसास होता है कि सोना-चांदी सुख का आधार नहीं, बल्कि दुखों का कारण बन सकता है। इसके बाद उसका हृदय परिवर्तन होता है और वह कल्लू भांड के साथ अपने विवाह को स्वीकार कर लेती है। इस प्रकार नाटक का सुखद अंत होता है। नाटक यह संदेश देता है कि अत्यधिक धन सुख नहीं देता, बल्कि कई बार दुखों का कारण बनता है। मनुष्य को जीवन को उसके वास्तविक स्वरूप में स्वीकार करना चाहिए। लोक तत्वों से परिपूर्ण यह नाटक आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। मंच पर मुख्य भूमिका में दुलारी बाई का चरित्र निभाने वाली रिमझिम तेनगुरिया ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। सूत्रधार एवं कल्लू भांड की भूमिका में इरशाद खान नजर आए। कटोरिमल इत्र बेचने वाला एवं चिमना मछुआरे का चरित्र श्लोक अग्रवाल ने निभाया। ननकू की भूमिका शिवम माकवे ने अदा की, जबकि अतुल जोशी गांव के पटेल के रूप में दिखाई दिए। गंगाराम का चरित्र शुभम शर्मा ने निभाया तथा फर्जीलाल की भूमिका में गणेश मादुलकर ने अपनी कलाबाजियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। ईश्वर की भूमिका नीतू शर्मा ने निभाई। कठपुतली नृत्य में कंचन शर्मा, अर्चिता श्रीवास्तव एवं धानी ने मनमोहक प्रस्तुति दी। मेकअप एवं ड्रेसअप का कार्य सुरेंद्र चौहान ने किया। विवाह नृत्य की प्रस्तुति छोटू बिल्लोरे एवं नितेश तिवारी ने दी। नाटक के गीत-संगीत का संयोजन करते हुए लवीना काले कुशवाहा ने गायन किया तथा अजय कुशवाहा एवं साथियों ने ढोलक पर संगत दी। नाटक का निर्देशन संजय तेनगुरिया तथा संयोजन एवं सह-निर्देशन इरशाद खान ने किया।
दो घंटे तक बांधे रखा दर्शकों को, दुलारी बाई नाटक का सफल मंचन

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