केप्शन। मंजीत सिंह
केप्शन। विधानसभा में लगे प्रश्नों की इमेज
अनोखा तीर, भोपाल। मप्र विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के विधायकों द्वारा बिजली उत्पादन कंपनी के प्रबंध संचालक मंजीत सिंह पर जलसाजी के गंभीर आरोप लगे हैं। उक्त आरोप के जवाब का उत्तर भी हां में होने के बावजूद सत्ता और संगठन ऐसे दोषी अधिकारी को 6 माह की कार्य अवधि बढ़ाने में राजी होने की खबर मंत्रालय से लेकर प्रदेश के चार बड़े बिजली घरों तक सुनाई दें रही है। ऐसे ही आरोप जबलपुर हाईकोर्ट में लग चुके हैं। गौरतलब है कि जबलपुर न्यायालय में दायर याचिका 28520/2024 में प्रबंध संचालक द्वारा लेखाधिकारी से एमडी का पद फर्जी तरीके से पाए जाने के सबूत प्रस्तुत किए गए। लेकिन उक्त खिलाड़ी अधिकारी ने न्याय पालिका की आवाज को चलमाया के दम पर शांत करवा दिया। बताया जाता हैं कि वही जलसाजी के सम्पूर्ण सस्तावेज के तहत भोपाल लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई थी, पड़ताल उपरांत लोकायुक्त ने उक्त मामले में एफआईआर दर्ज होने की चीख दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। बावजूद ऊर्जा प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई द्वारा एमडी के पद पर 6 साल की समय अवधि लगभग पूर्ण करने वाले लक्ष्मीपुत्र मंजीत सिंह को पुन: 6 माह का तीसरा कार्यकाल देने में सहमत होने की बात सामने आ रही है। बताया जाता हैं कि पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक द्वारा मप्र के चार बड़े बिजली घरों में अपने-अपने अधिकारी बैठा रखे हैं जो इनके इशारे में नाचकर बिजली घरों को खोखला कर रहे है। सतपुड़ा, सिंगाजी और बीरसिंगपुर पावर प्लांट में करीबन 60 प्रतिशत के ठेकाकरी की भागीदारी लोकनाथ, अक्का लाजिस और मेल्को जैसी कम्पनियाओं के हाथों में उनके नियम शर्तो पर देकर लक्ष्मी की उगाही की जा रही है। सनद रहे कि प्रदेश के चार बड़े पावर प्लांटो में अरबों रुपये की नियम विरुद्ध सफलाई होने की जानकारी सामने आ रही हैं, बावजूद ऐसे भ्रष्ट अधिकारी पर भाजपा सरकार के मुखिया का मेहरबान होना आगामी सत्ता बदलाव के संकेत हो सकते हैं।
—————————–

