अनोखा तीर, हरदा। प्रदेश में ग्रीष्मकालीन जायद फसल मूंग और उड़द के उपार्जन की तैयारियों के बीच शासन और विभाग की लापरवाही किसानों तथा पटवारियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। कृषि विभाग द्वारा 21 मई 2026 से जायद फसल सर्वेक्षण प्रारंभ करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन विभागीय क्रॉप सर्वे (गिरदावरी) ऐप अपडेट नहीं होने के कारण जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार, मूंग और उड़द के उपार्जन पंजीयन के लिए फसल गिरदावरी अनिवार्य है। इसके लिए पटवारियों को शीघ्र सर्वेक्षण पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों का पंजीयन प्रभावित न हो। लेकिन तकनीकी खामियों और ऐप के सुचारू रूप से संचालित नहीं होने के कारण सर्वेक्षण कार्य ठप पड़ा हुआ है। स्थिति यह है कि कई क्षेत्रों में किसानों ने मूंग और उड़द की फसल की कटाई शुरू कर दी है। ऐसे में पटवारियों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब तक ऐप चालू होगा, तब तक अनेक खेत खाली हो जाएंगे। ऐसे में गिरदावरी के दौरान खेतों में फसल का भौतिक सत्यापन नहीं हो पाएगा और भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पटवारियों का कहना है कि एक ओर शासन समय पर सर्वेक्षण पूरा करने का दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इससे उन पर अनावश्यक मानसिक तनाव बढ़ रहा है। यदि समय रहते ऐप को सुचारू नहीं किया गया तो उपार्जन पंजीयन प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि उन्होंने शासन की योजना के अनुसार मूंग और उड़द की खेती की है, लेकिन फसल कटाई के समय गिरदावरी नहीं होने से उन्हें उपार्जन और अन्य शासकीय लाभों को लेकर चिंता सताने लगी है। किसानों ने मांग की है कि शासन तत्काल क्रॉप सर्वे ऐप की तकनीकी समस्याओं का समाधान कर गिरदावरी कार्य शुरू कराए। कृषि एवं राजस्व विभाग की इस तकनीकी लापरवाही के कारण वर्तमान में किसान और पटवारी दोनों असमंजस की स्थिति में हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आगामी उपार्जन व्यवस्था और किसानों के पंजीयन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
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