Skip to content
Thursday, 29 October 2026
रायसेन

रातापानी अभ्यारण्य में जारी बाघ संघर्ष की घटनाएं, अब तक तीन बाघ और एक तेंदुए की मौत

3 min read
Text Size:

मंडीदीप। औबेदुल्लागंज वन मंडल में टेरीटोरियल क्षेत्र को लेकर बाघों के बीच आपसी संघर्ष रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। हालत यह है कि 11 माह में हुए चार बड़े संघर्षों में दो बाघ, एक बाघिन एवं एक तेंदुआ की मौत हो गई।

ताजा मामला सामने आने पर महकमे के जिम्मेदार अधिकारियों के माथे पर सलवटे खिंच गई। आनन-फानन में ही अधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंच कर बाघ के शव की मैदानी अमले से सुरक्षा की। शनिवार को विभागीय वरिष्ठ अधिकारी व चिकित्सकों का दल घटना स्थल पर पहुंच कर जांच की।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व व वन विहार के चिकित्सकीय दल ने पीएम किया। वन अमले ने अधिकारियों की उपस्थिति में तीन वर्षीय नर बाघ का जंगल मे दाह संस्कार किया। शार्ट पीएम रिपोर्ट के अनुसार बाघ की मौत का कारण शरीर पर मौजूद गहरे घाव बताए जा रहे हैं।

दो बाघों के बीच हुआ संघर्ष

बता दें कि रातापानी अभ्यारण के मैदानी क्षेत्र गौहरगंज रेंज की पांजरा बीट में दो बाघों के बीच जमकर संघर्ष हुआ जिसमें एक तीन वर्षीय बाघ की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर बाघ मृत मिला, वहाँ से थोड़े फासले पर क्रेशर खदान संचालित हो रही है। आपसी संघर्ष के बाद वन विभाग के नुमाइंदे उस बाघ को लेकर भी चिंतित है, जिसका संघर्ष मृत बाघ से हुआ था। अधिकारियों द्वारा जंगल में उसकी तलाश भी प्रारम्भ कर दी गई।

संघर्ष के दौरान मृत बाघ के शरीर पर पंजे और दांत के गहरे घाव थे। वहीं तीन वर्षीय नर बाघ की रीढ़ की हड्डी भी फाइट में टूट गई। इस बारे में मंडल अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि मृत बाघ के शरीर पर कई स्थानों पर दांत और पंजों के घाव मिले हैं। बाघ की मौत आपसी फाइट के चलते हुई है।

उल्लेखनीय है कि एक साल में संघर्ष की यह चौथी घटना है। विशेषज्ञों के अनुसार बाघों के बीच संघर्ष के मुख्य कारण हैं इनकी संख्या का बढ़ना, जबकि टेरीटोरियल एरिया में कमी होने के कारण संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं।

कब-कब हुई घटनाएं

अब्दुल्लागंज वन मंडल में बाघों के आपसी संघर्ष की पहली घटना चिकलोद रेंज की बर्रुखार बीट में हुई। उसके बाद 12 फरवरी से 15 अक्टूबर तक चार फाइटो में दो बाघ, एक बाघिन व एक तेंदुए की मौत हो चुकी है, जबकि एक घटना को विभाग आपसी संघर्ष इसलिए नहीं मानता कि एक बाघ घायल था, वह उपचार के अभाव में मृत मिला, वह घायल कैसे हुआ था इस पर आज तक पर्दा नहीं उठा।

इस वर्ष सबसे पहले 12 फरवरी को बाघ और तेंदुआ के बीच बरखेड़ा रेंज में संघर्ष हुआ था, जिसमे तेंदुआ की मौत हो गई। दूसरी घटना 22 जून को एक बाघ करमई के जंगल में घायल था, उसकी भी मौत हो गई। तीसरी घटना 18 अक्टूबर देहलाबाड़ी रेंज के नाहरकोला बीट में बाघ बाघिन के संधर्ष में बाघिन की मौत हुई। फिर संघर्ष में बाघ की मौत से विभागीय अधिकारी चिंतित हो गए।

181 Views
What do you think?

Leave a Reply