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Saturday, 17 October 2026
मध्य प्रदेश

रहवासियों ने किया शव दफन करने से मना: बोले- यहां बच्चे खेलते हैं, पुलिस ने मामला संभालते हुए मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान में करवाया दफन

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रहवासियों ने किया शव दफन करने से मना: बोले- यहां बच्चे खेलते हैं, पुलिस ने मामला संभालते हुए मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान में करवाया दफन
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दतिया3 घंटे पहलेकॉपी लिंकदतिया में शव दफन का मामलाजिले की तहसील स्थानीय इंदरगढ़ में एक बार फिर शव को दफनाने के लिए विवाद हो गया। एक महिला के शव को दफनाने के लिए दो गज जमीन मयस्सर कराने में परिवार वालों को 18 लगभग घंटे मशक्कत करना पड़ी।मामला यह था कि मुस्लिम समाज के फकीर जाति को कब्रिस्तान के लिए वर्षों से शासन ने जमीन आवंटित कर रखी थी किंतु अब वहां पर घनी बस्ती हो गई है। और चार-पांच साल में कभी कभार ही कब्रिस्तान आते हैं। क्योंकि इस जाति की संख्या ही गिनी चुनी है। बुधवार को मुस्लिम समाज के साईं परिवार की महिला शहजादी शाह का इंतकाल हो गया था और जब उसके परिवार के लोग अपने समाज के कब्रिस्तान में उसे दफनाने पहुंचे तो वहां आसपास रहने वालों ने आपत्ति की और कहा कि शव को यहां दफनाया नहीं जा सकता क्योंकि यहां पर बच्चे खेलते हैं और सालों से यहां कोई मुर्दा दफन नहीं हुआ। इस पर साईं समाज के चंद लोगों ने कागज भी बताएं कि यह हमारे समाज का है। फिर भी बात नहीं बनी इसके बाद थाना प्रभारी व तहसीलदार मोके पर पहुंचे। इस कवायद में लगभग 16 से 18 घंटे बीत गए।लाश को 2 गज जमीन मयस्सर कराने के लिए शासन प्रशासन और पुलिस का अमला जुटा फिर बीच का रास्ता निकाला गया कि साईं समाज के कब्रिस्तान में नहीं दफनाकर शव को मुस्लिम कब्रिस्तान में दफन किया जाए। इसके बाद परिवार वालों को भी समझाया गया। तब जाकर बात बनी और मुस्लिम फकीर समाज की शहजादी को दो गज जमीन मुस्लिम कब्रिस्तान में मिल पाई इसके लिए भी मुस्लिम समाज से भी अनुमति लेना पड़ी। इससे पहले भी इंदरगढ़ में ही एक ईसाई परिवार में मौत हो जाने पर उसके दफनाने पर भी यही मामला उठा था बता दें कि इंदरगढ़ में मात्र तीन ईसाई परिवार है और उनका कोई कब्रिस्तान भी नहीं है। तब वह परिवार भी शव को लेकर भटकता फिरा था फिर लांच में सिंध नदी के पास ईसाई परिवार ने शव को दफन किया था।परमानंद शर्मा, थाना प्रभारी, इंदरगढ़ का कहना है कि मुस्लिम समाज के फकीर समुदाय का कब्रिस्तान शहर के बीचो-बीच है। घनी आबादी है। यह सही है कि बच्चे वहां खेलते हैं। इस वजह से दूसरे समाज के लोगों ने आपत्ति की थी। जिसे मुस्लिम समाज में दफनाने की अनुमति देकर सुलझा लिया गया।खबरें और भी हैं…

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