अनोखा तीर, सिराली। समीपस्थ ग्राम जात्राखेड़ी में आयोजित संत शिरोमणि संत सिंगाजी महाराज की परचरी पुराण कथा का विश्राम दिवस श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर रहा। मंडलेश्वर से पधारी निमाड़ की सुप्रसिद्ध कथावाचिका चेतना भारती ने अपने प्रवचनों में आत्मा, परमात्मा और जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थूल शरीर के भीतर सूक्ष्म एवं कारण शरीर विद्यमान है और उसी कारण शरीर में बीज रूप में परमात्मा प्रत्येक जीव में सत्य, चित्त और आनंद स्वरूप विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि माया के प्रभाव में आकर जीव अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है और 84 लाख योनियों में भटकता रहता है। किंतु जब वह अपने निज स्वरूप को पहचान लेता है, तब ब्रह्ममय होकर परम आनंद की प्राप्ति करता है। जिस प्रकार सरिता स्वत: सागर की ओर प्रवाहित होती है, उसी प्रकार जीव भी आनंद और प्रकाश की ओर अग्रसर होता है, परंतु गुरु के अभाव में वह क्षणभंगुर सांसारिक सुखों में उलझा रहता है। दीदी ने संतों के अवतरण का उद्देश्य बताते हुए कहा कि संत मानव को यह स्मरण कराते हैं कि सांसारिक दुखों और क्षणिक सुखों से परे भी एक नित्य आनंदमय जगत है, जो आत्मस्वरूप की अनुभूति से प्राप्त होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक जीव गौतम बुद्ध, कबीर और संत सिंगाजी महाराज की तरह स्वयं को पहचान नहीं लेता, तब तक जन्म-मरण का चक्र चलता रहता है। कथा पूर्णाहुति के अवसर पर चेतना भारती ने आयोजक परिवार, समस्त ग्रामवासियों एवं श्रोताओं को शुभाशीष प्रदान किए। कथा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं एवं व्यवस्था संभालने वाले भाइयों को साधुवाद दिया गया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने संत सिंगाजी महाराज के जयकारों के साथ भावपूर्ण विदाई दी।




