अनोखा तीर, हरदा। भुआणा क्षेत्र के गुर्जर संतों के सम्मान में आयोजित तीन दिवसीय गुर्जर जन चेतना यात्रा का समापन पावन स्थल राम जी बाबा में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन भुआणा गुर्जर महासभा हरदा-नयाखेड़ा के संरक्षण में तथा भुआणा प्रांतीय गुर्जर युवा सभा हरदा के अध्यक्ष संजय बिजगाने एवं नया खेड़ा अध्यक्ष रामविलास चौधरी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। यात्रा का शुभारंभ संत श्री बुखारदास बाबा की तपोभूमि छनेरा से ध्वज पूजन (निशान), विधिवत पूजा-अर्चना तथा भगवान देवनारायण एवं संतों के पदचिह्नों की शोभायात्रा रथ पूजन के साथ किया गया। तीन दिनों तक चली इस वाहन यात्रा ने छनेरा, खिरकिया, संत श्री कालू बाबा उड़ा हरदा, संत श्री कान्हा बाबा सोडलपुर टिमरनी, रहटगांव, सिवनीमालवा सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर संतों के जीवन, त्याग, सेवा और समाज सुधार के संदेशों का प्रसार किया। यात्रा का आध्यात्मिक उद्देश्य गुर्जर संतों की तपोभूमि और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में नवचेतना लाना रहा। इसके माध्यम से युवाओं को आदर्शों का जीवन परिचय कराना, सामाजिक संगठन व्यवस्था को सुदृढ़ करना, नशामुक्त समाज की परिकल्पना को बढ़ावा देना और संस्कारवान समाज के आयामों पर कार्य करने का संदेश दिया गया। मार्ग में भुआणा गुर्जर ग्रामों में जगह-जगह सामाजिक बंधुओं एवं मातृशक्ति द्वारा भव्य स्वागत, सत्संग, भजन-कीर्तन, प्रवचन और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया। सामाजिक एकता और जागरूकता के संदेश के साथ यह यात्रा समाज के विभिन्न वर्गों युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और सामाजिक संगठनों को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम बनी। समापन समारोह संत श्री रामदास जी स्वामी की नगरी नर्मदापुरम में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भुआणा गुर्जर समाज की नवयुवक संस्थाओं, गुर्जर महिला मंडल छनेरा, खिरकिया, हरदा, टिमरनी, रहटगांव, सिवनीमालवा, मंगल भवन समितियों, गुर्जर ग्राम विकास समिति एवं गुर्जर ग्राम महिला मंडल सहित अनेक सामाजिक संगठनों का सराहनीय सहयोग रहा। भुआणा के समस्त सामाजिक बंधुओं एवं मातृशक्ति ने यात्रा के स्वागत, अतिथि सत्कार और व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। यात्रा संयोजक युवा सभा सचिव नीरज गुर्जर (खोरे) एवं युवा संगठन मंत्री हरदा गुर्जर वैभव पाटिल ने समस्त सामाजिक बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। गुर्जर जन चेतना यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन न होकर सामाजिक चेतना, संगठन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरी।

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