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Friday, 23 October 2026
हरदा

शिवमहापुराण ज्ञान यज्ञ का विश्राम दिवस श्रद्धा व ज्ञान के साथ संपन्न

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अनोखा तीर, सिराली। ब्रह्मकुमारी संस्था द्वारा आयोजित शिवमहापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का विश्राम दिवस आज अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बताया गया कि शिवमहापुराण कथा का कोई अंतिम दिवस नहीं होता, क्योंकि यह ज्ञान और जीवन-परिवर्तन की सतत प्रक्रिया है। आज के शिव रुद्र ज्ञान यज्ञ में समझाया गया कि संसार और मनुष्य की नकारात्मक स्थितियों पर विचार करने से चिंता उत्पन्न होती है, जबकि परमात्मा पर चिंतन करने से समाधान प्राप्त होता है। कथा में बताया गया कि सभी धर्मों में नरक का वर्णन मिलता है, वहीं शिवपुराण की उमा संहिता में नरक से निकलने के मार्ग का भी सुंदर विवेचन किया गया है। जीवन में कम से कम दो ग्रंथ-श्रीमद्भगवद्गीता एवं गरुड़ पुराण अवश्य पढ़ने चाहिए, जिनमें मुक्ति के द्वारों का स्पष्ट उल्लेख है। यह भी बताया गया कि मृत्यु के बाद ही नहीं, बल्कि इसी जीवन में कर्मों के अनुसार नरक जैसी यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। इसलिए शुभ कर्मों में कभी विलंब नहीं करना चाहिए और धर्म की मर्यादाओं में रहकर आचरण करना चाहिए। राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी नीलम दीदी ने शास्त्रों में वर्णित विभिन्न नरकों की भोगनाओं का आध्यात्मिक स्पष्टीकरण देते हुए कर्म सिद्धांत को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कर्म आत्मा करती है और उसका फल भी आत्मा ही भोगती है। साथ ही दान, सहयोग और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दान सदैव पात्र देखकर करना चाहिए तथा बीमार व्यक्ति को कर्ज नहीं, बल्कि सहयोग देना चाहिए। रुद्र ज्ञान यज्ञ में आहुति के प्रतीकात्मक अर्थ भी समझाए गए—जौ तन का, घी धन का, शक्कर लोभ का और चावल अभिमान का प्रतीक हैं। इस अवसर पर सभी आत्मिक भाई-बहनों ने स्थूल आहुतियों के साथ-साथ अपने मनोविकारों की भी आहुति दी। प्रसाद वितरण के साथ आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अंत में ब्रह्मकुमारी परिवार की ओर से समस्त नगरवासियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

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