अनोखा तीर, हरदा। मौसम की बेरूखी का असर फसलों पर साफ देखा जा सकता है। बदलते मौसम, लगातार बादलों और बेमौसम बारिश ने चने की फसल की सेहत पर बुरा असर डाला है। नमी और कम तापमान के कारण चने के खेतों में पीले-पीले टाके उभर आए हैं। जिससे चने के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ना लाजमी है। जानकारों की मानें तो ऐसे मौसम में फसल के मुरझाकर सूखने की स्थिति बन जाती है। अनचाही बारिश से जड़ो को नुकसान पहुंचता है। वहीं कीट का प्रकोप भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में फसलों का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। साथ ही, खेतों से अतिरिक्त पानी जल्द से जल्द निकालना ही फसल की सेहत के लिए ठीक है। जानकारी के अनुसार बीतें दिनों बेमौसम बारिश के बाद लगातार मौसम छाये रहने की वजह से ये हालात बने हैं। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान इसकी रोकथाम के जतन में जुटा है। यहां बताना होगा कि मौसम के तेवर को भापकर इस साल चने का रकबा पिछले साल की तुलना इस साल चने का रकबा घट गया है। गत वर्ष जहां चना करीब 60 हजार हेक्टेयर में बोया गया था, जो सिमटकर इस साल 35 हजार हेक्टेयर के आसपास है।
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