-विद्यना का ठानी रे मन में, राम सिया भेज दिए री वन में : रविशंकर गौर
अनोखा तीर, रहटगांव। ग्राम झाड़बीड़ा में चल रही रामलीला मंचन के चतुर्थ दिन दशरथ-कैकई संवाद, दासी मंथरा द्वारा कैकई को भ्रमित करना, राम वनवास तथा दशरथ मरण का भावपूर्ण मंचन प्रस्तुत किया गया। यह मंचन मंगलवार को शशि रामलीला मंडल के कलाकारों द्वारा किया गया। मंचन के दौरान दासी मंथरा ने रानी कैकई को यह कहकर भ्रमित किया कि यदि राम को राज्य मिला तो भरत का भविष्य क्या होगा। मंथरा की बातों से मतिभ्रमित होकर कैकई कोप भवन चली गईं। राजा दशरथ के वहां पहुंचने और कोप का कारण पूछने पर रानी कैकई ने उन्हें दिए गए दो वरदानों की याद दिलाई। कैकई ने दशरथ से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राज्य मांगा। कैकई के कठोर वचनों से राजा दशरथ अत्यंत व्यथित हो गए। उन्होंने रानी को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कैकई अपनी बात पर अड़ी रहीं। अंतत: रघुकुल की रीति का पालन करते हुए राजा दशरथ ने कैकई को वरदान दे दिया। इसके बाद भगवान राम ने पिता के वचन का मान रखने के लिए सभी सुखों का त्याग कर वनवास ग्रहण किया। व्यास रविशंकर गौर द्वारा प्रस्तुत भजन ‘विद्यना का ठानी रे मन में, राम सिया भेज दिए री वन मेंÓ ने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से भावुक किया। इस दौरान मंच संचालक पवन गौर, सतीश सीटोके, सुरेश गौर, सत्यनारायण गौर, तोताराम गौर, लोकेश बागरे सहित सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
कैकई ने मांगे वचन, राम को मिला वनवास

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