भाजपा की अंदरूनी खींचतान सब जेल में बने नवीन डबल स्टोरी बैरक व वी.सी.कक्ष लोकार्पण में हुई उजागर 

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शिलालेख पर नाम अंकित नहीं होने से कुछ जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम से बनाई दूरी

विकास पवार बड़वाह – काटकूट फाटे स्थित स्थानीय सब जेल में शुक्रवार सुबह 11 बजे नवनिर्मित डबल स्टोरी बैरक एवं वी.सी.कक्ष का लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल एवं विशेष अतिथि विधायक सचिन बिरला रहे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने फीता काटकर नवीन भवनों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर जेलर युवराज सिंह मुवेल ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 करोड़ 19 लाख 61 हजार रुपये की लागत से यह डबल स्टोरी बैरक निर्मित किया गया है। पुराने बैरक की तुलना में नवीन बैरक में हवा और रोशनी की बेहतर व्यवस्था है। पुराने बैरक में जहां 70 बंदियों की क्षमता थी, वहीं अब 110 कैदियों को रखने की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने सांसद श्री पाटिल से सब जेल परिसर में बोरिंग करवाने एवं कुछ स्थानों पर सड़क निर्माण की मांग रखी, जिस पर सांसद ने शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया।

 

शिलालेख बना कार्यक्रम में चर्चा का विषय— 

 

 

कार्यक्रम के दौरान भाजपा की अंदरूनी खींचतान उस समय खुलकर सामने आ गई, जब नवनिर्मित बैरक भवन के बाहर लगे शिलालेख में नपाध्यक्ष राकेश गुप्ता, ग्राम पंचायत सिरलाय के सरपंच राजकुमार वर्मा एवं नगर मंडल अध्यक्ष अंकित गुप्ता के नाम नदारद पाए गए। इसे लेकर कार्यक्रम स्थल पर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा होती रही। गौरतलब है कि जिस जेल में यह बैरक बना है, वह क्षेत्र ग्राम पंचायत सिरलाय के अंतर्गत आता है। ऐसे में भवन निर्माण के दौरान पंचायत स्तर की भूमिका के बावजूद सरपंच का नाम शिलालेख में नहीं होना, भाजपा की अंदरूनी राजनीति को उजागर करता नजर आया। हालांकि जेलर मुवेल ने कहा कि हमें जो सूची दी गई थी, उसी के अनुसार शिलालेख पर नाम अंकित किए गए हैं।

पहले और अब में नामों का अंतर क्यों —-

 

 

स्थानीय सब जेल में पूर्व में तत्कालीन एसडीएम अनुकूल जैन के कार्यकाल में भी एक नवीन बैरक का लोकार्पण हुआ था। तब भी शिलालेख पर सांसद, विधायक के साथ ग्रामीण एवं नगर मंडल अध्यक्षों के नाम भी अंकित किए गए थे। लेकिन इस बार के लोकार्पण में शिलालेख पर सांसद,विधायक, जिला पंचायत सदस्य,जिला उपाध्यक्ष एवं ग्रामीण मंडल अध्यक्ष खुमान जाट का ही नाम दर्ज किया गया।हालाकि जिन जनप्रतिनिधियों के नाम शिलालेख में अंकित नहीं थे, उन जनप्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।

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