-बैंक के चक्कर काट रहे किसान
अनोखा तीर, मसनगांव। शासकीय खरीदी में चना विक्रय करने के बाद किसानों को बैंक के चक्कर काटना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर चने की बिक्री 26 मार्च को ग्राम की समिति में की थी। जिसकी राशि उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुई है जबकि मंडी में चने के भाव समर्थन मूल्य से ऊपर होने के बाद किसानों को नगद भुगतान किया जा रहा है। वहीं शासकीय खरीदी में उपज बिक्री के बाद किसानों को राशि के लिए भटकना पड़ रहा है। कंकरिया के किसान कमलेश आंजने, नितेश आंजने, राजा पाटिल ने बताया कि 5650 के भाव में अपनी चना उपज को ग्राम के वेयरहाउस पर तुलवाया था, परंतु बिल बनने के बावजूद 17 दिन बाद भी राशि प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को अपना कर्ज चुकाने के लिए राशि मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि रबी सीजन में फसल बिक्री के बाद बैंकों में खुले हुए केसीसी खातों में राशि जमा करना पड़ती है, जिसे पलटने के बाद दोबारा राशि का उपयोग करने के लिए निकला जाता है। इसके लिए किसान उपज निकलते ही बिक्री कर पुराने कर्ज को अदा करता है , लेकिन समय पर भुगतान होने से उन्हें ब्याज भरना पड़ रहा है।
शासकीय खरीदी मे बिक्री के बाद वसूली जा रही ऋण की राशि
शासकीय खरीदी में उपज बिक्री के पश्चात किसानों से सहकारी समिति के द्वारा दिए गए ऋण की राशि वसूली जा रही है। लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों में उपज बिक्री के बाद शासन के द्वारा राशि खातों में डाली जाती है, जिससे किसान अपना केसीसी ऋण चुकता करते हैं, पर राशि समय पर न मिलने से किसानों को अतिरिक्त ब्याज भरना पड़ता है। इस संबंध में समिति के सहायक प्रबंधक अखिलेश पाटिल ने बताया कि राशि में थोड़ा समय लगता है। एक-दो रोज में सभी किसानों खातों में राशि जमा हो जाएगी।
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