रेलवे इंजीनियरों का कमाल…

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-खराब मदरबोर्ड की मरम्मत कर बचाए लाखों रुपए

अनोखा तीर, भोपाल। मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी के कुशल मार्गदर्शन में पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के अंतर्गत इलेक्ट्रिक लोको शेड, इटारसी ने एक अभिनव पहल करते हुए रेलवे के संसाधनों का न केवल कुशलतापूर्वक उपयोग किया, बल्कि उल्लेखनीय आर्थिक बचत भी सुनिश्चित की है। वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (कर्षण चल स्टॉक) इटारसी शेड नीरज कुमार शर्मा के अनुसार इलेक्ट्रिक लोको शेड, इटारसी में वर्तमान में 269 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक इंजनों का रखरखाव किया जाता है, और प्रत्येक लोकोमोटिव में लगा स्पीडोमीटर ट्रेन की वर्तमान गति दर्शाकर चालक दल को सुरक्षित परिचालन में मदद करता है। वर्ष 2024-25 के दौरान, गलत तरीके से मेमोरी कार्ड लगाने के कारण 65 स्पीडोमीटर के मदरबोर्ड के पिन क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन कार्डों की बाजार से नई खरीद के बजाय, शेड के अनुभवी तकनीकी दल ने इन-हाउस मरम्मत का सराहनीय निर्णय लिया। इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व इलेक्ट्रिक लोको शेड इटारसी के सेक्शन के एसएसई दीपक यादव, जेई अनुराग बढ़खने, टेक्निशियन-नितिन पटेल एवं टेक्निशियन धर्मेंद्र चौरे ने किया। शेड अधिकारियों के निर्देशन में इस टीम ने अपने तकनीकी ज्ञान और उपलब्ध संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग करते हुए क्षतिग्रस्त मदरबोर्ड की सफल मरम्मत की। इस अभिनव प्रयास से भारतीय रेलवे को 13 लाख 22 हजार 675 रुपए की उल्लेखनीय बचत हुई है। बाजार में मेक के एक मदरबोर्ड की कीमत 18 हजार 685 और मेक की कीमत 29 हजार 500 है। टीम ने अपने कुशल प्रबंधन, तकनीकी दक्षता और संसाधनों के समुचित उपयोग से रेलवे की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने कहा कि भोपाल मंडल की यह पहल न सिर्फ तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, लगन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक भी है। पश्चिम मध्य रेलवे भोपाल मंडल, इलेक्ट्रिक लोको शेड इटारसी के इस उल्लेखनीय प्रयास की सराहना करता है।

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