दुगाया परिवार की अनूठी पहल, बिटिया की शादी में किन्नरों को किया आमंत्रित
माही किन्नर की आंखों से आंसू छलक आएं, आज हमें लगा जैसे अपनी बिटिया की शादी कर रहे हैं। आपके बच्चे ही तो हमारे होते हैं, ईश्वर की कृपा ही ऐसी है कि आपकी हर खुशी को हम अपनी मानते हैं। आप सुखी रहें, खुशहाल रहे यही कामना तो हम जीवन भर करते हैं। आज दुगाया परिवार ने हमें अपना समझा और बिटिया की शादी में बुलाया इस बात से जो खुशी हमें मिली, वह आपको कैसे बताऊं
दैनिक अनोखा तीर, हरदा। शहर के दुगाया परिवार ने अपनी बिटिया की शादी में अनूठी पहल करते हुए अन्य रिश्तेदारों, परिचितों के साथ ही किन्नर समुदाय को भी विवाह पत्रिका देकर आमंत्रित किया था। जिन्होंने शादी दौरान आर्शीवाद समारोह में शामिल होकर न केवल वहां मौजूद लोगों को अपितु मंच पर पहुंच कर वर-वधू को भी आर्शीवाद प्रदान किया। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरत में पड़ गए।
अक्सर शादी विवाह, बच्चों के पैदा होने या नवीन गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों उपरांत किन्नर समुदाय के लोग उस घर पहुंच कर नेग मांगने का कार्य करते हैं। अधिकांश लोग तो इस बात से भयभीत भी रहते हैं कि अगर किन्नर आ गए तो वह बतौर नेग बहुत कुछ मांगने लगते हैं। उन्हें नाराज भी नहीं करना चाहते और उनकी मूंह मांगी मांग भी पूरा नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में किन्नरों के आने की सूचना मात्र से ही कुछ लोग घबराकर एक दूसरे को ताकने झांकने लगते हैं। ऐसी स्थिति में किन्नरों को शादी की पत्रिका देकर विशेष आग्रह करते हुए शादी समारोह में आमंत्रित करने का कार्य ग्राम रेल्वा निवासी डां रामकृष्ण दुगाया के परिवार द्वारा किया गया। हरदा सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष ललित पटेल दुगाया की बिटिया डॉ पल्लवी की शादी सीपीडब्ल्यूडी इंजिनियर दीपक मांगुल्ले के साथ शहर के एक मैरिज गार्डन में आयोजित थी। पूरा मैरिज गार्डन मेहमानों से गुलजार था तभी अचानक शहर के किन्नरों की टोली का शुभागमन हुआ। सामान्य तौर पर ऐसे समारोह दौरान किसी प्रसिद्ध नेता अभिनेता या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जैसे किसी नामचीन हस्तियों के आगमन और उनके आर्शीवाद समारोह के मंच पर जाने दौरान उपस्थित जनसमुदाय उन्हें देखने मंच के आसपास एकत्र हो जाता है। ठीक उसी तरह किन्नरों के मंच पर पहुंचने दौरान भी देखने को मिला। वर-वधू मंचासीन थे और लोगों का उन्हें शुभकामनाएं तथा व्यवहार देखकर फोटो खिंचवाने का सिलसिला चल रहा था। तभी अचानक डां. रामकृष्ण दुगाया वहां आकर कुछ समय के लिए मंच पर जाने वाले लोगों से रुकने का आग्रह करते हैं और अपने साथ किन्नर समुदाय के आगंतुक सदस्यों को लेकर मंच पर पहुंचते हैं। उनकी आवभगत भी किसी वीआईपी मेहमान की तरह ही की जाती है। किन्नर समूह की मुखिया माही अटले अपने साथ लाई भेंट सामग्री तथा वर वधू दोनों को नगद राशि देते हुए आर्शीवाद प्रदान करते हैं। वर वधू के साथ फोटो खिंचवाई ओर बहुत प्रसन्नता से दुगाया परिवार का आभार व्यक्त किया। इस दौरान चर्चा करते हुए माही अटले की आंखें छलक आई, भाव-विभोर होकर उन्होंने कहा कि आपने हमें अपने पारिवारिक आयोजन में इतना सम्मान देते हुए आमंत्रित किया, इससे हमें भी लगा कि कोई तो है जो हमें इस योग्य समझता है। हम लोगों की भी इच्छा होती है कि ऐसे आयोजनों में शामिल हो। हमारी अपनी कोई सन्तान नहीं है तो क्या हुआ आपके बेटा-बेटी को ही हम अपना मानते हैं। उनकी खुशी के अवसर पर अगर हम आएंगे तो उन्हें आर्शीवाद ही प्रदान करेंगे। उल्लेखनीय है कि किन्नरों को ईश्वर कृपा से यह वरदान प्राप्त हैं कि वह प्रसन्न भाव से जिन्हें आर्शीवाद प्रदान करते हैं उनके जीवन की विघ्न-बाधाएं समाप्त हो जाती है। स्वयं प्रभु श्रीराम ने उन्हें यह वरदान दिया था। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास के लिए रवाना हुए तो संपूर्ण नगरवासी उन्हें नगर सीमा तक छोड़ने आएं थे। उस दौरान श्रीराम ने कहा था कि सभी नर नारी वापस अपने अपने घर जाएं। लेकिन उन्होंने किन्नरों के लिए कुछ नहीं कहा था इसलिए किन्नर 14 वर्षों तक वहीं खड़े रह कर अपने प्रभु श्रीराम का इंतजार करते रहे। जब वनवास खत्म कर श्रीराम वापस अयोध्या लौटे तो उन्होंने देखा कि जो किन्नर उनके वन जाते समय जहां खड़े थे वह आज भी वही है। जब उन्हें इस बात का पता चला तब श्रीराम ने उन्हें यह वरदान दिया था। अपनी बिटिया की शादी में किन्नरों को आमंत्रित करने वाले ललित पटेल दुगाया ने कहा कि किन्नरों आ आर्शीवाद तो सब लेना चाहते हैं लेकिन उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए कोई आगे नहीं आता है। मुझे लगा कि अगर हम उन्हें अन्य विशिष्ट अतिथि की तरह ही अपने खुशी के अवसर पर आमंत्रित करेंगे तो न केवल उनका आर्शीवाद प्राप्त होगा, बल्कि उन्हें भी स्वयं को समाज का अभिन्न अंग होने का गौरव प्राप्त होगा।





