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Friday, 9 October 2026
हरदा

एक राज्यसभा सीट के लिए भाजपा में रेस, दावेदार के रूप में उभरे पांच प्रमुख नेता

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दिनेश निगम ‘त्यागीÓ भोपाल। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा की उनकी सीट खाली हो गई है। यह सीट चूंकि भाजपा को मिलना तय है, इसलिए इसे हासिल करने के लिए भाजपा में रेस शुरू हो गई है। सीट पर सबसे मजबूत दावा गुना के पूर्व सांसद केपी सिंह यादव का है। उनका टिकट काट कर भाजपा ने ज्योतिरादित्य को चुनाव लड़ाया था। 2019 में केपी ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर गुना में सिंधिया को हराया था। तब सिंधिया कांग्रेस में थे और कांग्रेस के टिकट पर ही चुनाव लड़े थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने केपी को आश्वासन दिया था कि सिंधिया के जीतने पर खाली होने वाली राज्यसभा की सीट में उन्हें अवसर दिया जाएगा। चुनाव के दौरान केपी द्वारा भितरघात करने की कोई शिकायत भी सामने नहीं आई। ऐसे में अमित शाह द्वारा दिए गए आश्वासन की पूर्ति होती है या किसी अन्य भाजपा नेता को मौका दिया जाता है, यह देखने लायक होगा। सिंधिया की कोशिश केपी को रोकने की होगी क्योंकि दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। फिलहाल केपी सहित 5 प्रमुख दावेदारों की राज्यसभा की इस सीट पर नजर है।
चंबल-ग्वालियर अंचल से तीन प्रमुख दावेदार
सिंधिया चंबल-ग्वालियर अंचल से आते हैं। राज्यसभा सीट के लिए यहां से ही सर्वाधिक तीन दावेदार हैं। केपी यादव के अलावा जयभान सिंह पवैया, विवेक शेजवलकर और नरोत्तम मिश्रा भी राज्यसभा पहुंचने की रेस में हैं। जयभान सिंह अंचल में संघ और हिंदुत्व का बड़ा चेहरा हैं। विवेक शेजवलकर ग्वालियर से सांसद थे। उनका टिकट काट कर भारत सिंह कुशवाहा को मौका दिया गया है। वे चुनाव जीत भी गए हैं। शेजवलकर चाहते हैं कि उन्हें राज्यसभा के लिए मौका दिया जाए। अंचल के तीसरे सशक्त दावेदार हैं प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा। अमित शाह के नजदीक हैं और दतिया से विधानसभा चुनाव हार गए थे। वे राज्यसभा के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के भी दावेदार हैं।
रमाकांत के लिए कोशिश कर सकते शिवराज
राज्यसभा के लिए एक और दावेदार हैं विदिशा से पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव। 2019 में विदिशा से वे 5 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर चुनाव जीते थे, लेकिन 2024 में उनके स्थान पर शिवराज सिंह चौहान को प्रत्याशी बना दिया गया। रमाकांत की गिनती शिवराज के खास समर्थकों में होती है। इसलिए शिवराज चाहेंगे कि रमाकांत ने चूंकि उनके लिए सीट छोड़ी हैं, इसलिए राज्यसभा के लिए उनके नाम पर विचार हो। रमाकांत ब्राह्मण हैं और सहकारी नेता भी। केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रदेश से 6 नेता शामिल हुए हैं लेकिन इनमें से एक भी सामान्य वर्ग से नहीं है। इस आधार पर भी उनकी पैरवी की जा सकती है। हालांकि एक अन्य दावेदार नरोत्तम भी ब्राह्मण हैं। शिवराज के सांसद बनने के बाद खाली होने वाली बुदनी विधानसभा सीट के लिए भी रमाकांत दावेदार हैं। राज्यसभा हाथ न लगने पर शिवराज उनकी सिफारिश बुदनी के लिए कर सकते हैं।

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