फिर प्रशासन की बड़ी लापरवाही..

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नितेश गोयल, हरदा। राजेश अग्रवाल की पटाखा फैक्ट्री में हुए भयानक विस्फोट के बाद जिला प्रशासन ने ग्राम कुंजरगांव में लायसेंसी प्रदीप अग्रवाल की 2 पटाखा फैक्ट्री नायब तहसीलदार हंडिया द्वारा सील कर दी गई। इसके अलावा रहटाखुर्द में लायसेंसी गुलाम हुसैन, निजामुद्दीन और उमरदराज की कुल 3 फैक्ट्री एक ही परिसर में स्थित होने से सील्ड की गई। रेहटाखुर्द में ही लायसेंसी सोमेश अग्रवाल की खुले में स्थित फैक्ट्री में पटाखे सूखने के लिए रखे थे, जिन्हें फायर ब्रिगेड के माध्यम से गीला कर नष्ट किया गया। इसके अलावा सिराली तहसील के ग्राम पिपलपानी स्थित 2 पटाखा फैक्ट्री भी सील की गई है।

इन सब कार्रवाईयों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन ने कितना अच्छा काम किया है, जो जिले में संचालित सभी पटाखा फैक्ट्रियों को सील कर दिया। लेकिन ऐसा नहीं है, इस मामले में प्रशासन ने बहुत बड़ी चूक की है, जो फिर एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। हम राजेश अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल की ही रहटाखुर्द में स्थित पटाखा फैक्ट्री की बात करें तो यहां पर लाखों की तादाद में खुले में सूखते हुए सुतली बम मिले हैं। टीन शेड के अंदर ही पूरा कारखाना चल रहा था। जैसे ही बैरागढ़ में धमाके हुए थे, तो यहां की लेबर और काम करने वाले इसे खुला ही छोड़कर भाग गए थे। तब से दो दिन तक यह फैक्ट्री लाबारिस अवस्था में ही रही है। आज प्रशासन द्वारा उस फैक्ट्री में फैले सुतली बमों पर पानी डालकर उसे तो नष्ट करने की कार्यवाही की है, लेकिन प्रशासन यह भूल गया कि इस फैक्ट्री मालिक सोमेश अग्रवाल के पास १५०० किलो बारूद रखने का लायसेंस था। जो उसके टीन के गोडाउन में रखा हुआ है। उस गोडाउन का प्रशासन ने ताला खोलकर देखने की जहमत तक नहीं उठाई। हो सकता है कि जिस तरह बेरागढ़ की उस फैक्ट्री में जिस तरह अथाह बारूद का स्टॉक रखा था, उसी तरह इस फैक्ट्री के गोडाउन में टनो से बारूद हो सकता है। इसी तरह इन अग्रवाल बंधुओं की पीपलपानी और कुंजरगांव में स्थित फैक्ट्री में भी प्रशासनिक अधिकारियों ने मात्र सील करने की ही कार्यवाही की है। इन फैक्ट्रियों में भी बारूद के स्टॉक को प्रशासनिक अधिकारियों ने देखा तक नहीं है। रहटाखुर्द की जो फैक्ट्री को प्रशासन सील करने की बात कर रहा है, वह फैक्ट्री पूरे खुले में बनी हुई है। उसे बिल्कुल सील तो किया ही नहीं जा सकता। अगल-बगल में गेहूं के खेत हैं, जिसमें मात्र तार फेंसिंग की गई है। फैक्ट्री की वर्तमान में ऐसी स्थिति है कि जगह-जगह बारूद के कंटेनर खुले में पड़े हुए हैं।

यहां पर बारूद का अथाह भंडार है। प्रशासन ने जो सील करने की कार्यवाही की है, वह सिर्फ बाहर के गेट में की गई है। इन लाबारिस सील्ड फैक्ट्रियों में कोई दुर्घटना घटित हो जाती है तो यहां पर भी रिहायशी क्षेत्र है जो फिर एक नई दुखद त्रासदी को जन्म दे सकता है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल इन बारूद के गोदामों को किसी भी तरह नष्ट कराने की कार्यवाही करें, क्योंकि सील्ड फैक्ट्रियों के तो आरोपियों के जमानत पर आने के बाद फिर दरबाजे खुल सकते हैं और फिर पुन: वह अपने हिसाब से अपना व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं। इन आरोपियों के इतने कुकर्म हो चुके हैं कि इनकी जो संपत्तियां हैं सब पर ही बुलडोजर चलाकर जिस तरह इन्होंने लोगों को पैसों की हवस में जमींदोज कर दिया है, उन्हें भी पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।

आरोपी की संपत्ति बेचकर दिया जाए मुआवजा

५ हजार रुपए प्रतिमाह कमाने वाला राजेश अग्रवाल चंद सालों में पटाखे के इस अवैध व्यवसाय से अरबपति बन गया। उसके इस सफर में अब तक २२ जाने जा चुकी हैं। जिस तरह बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा था कि ऐसी कार्यवाही होगी कि सब देखेंगे। वह अब दिखाने का वक्त आ गया है, राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने तो अपने स्तर पर पीड़ितों की मदद करने का प्रयास किया है लेकिन जिस व्यक्ति के कुकृत्य के कारण यह घटना घटित हुई है, उस व्यक्ति को अब समय है कि फिर से 5 हजार रुपए महीना कमाने वाला ही बनाया जाए। उसके द्वारा जो करोड़ों-अरबों की अथाह संपत्ति इस अवैध पटाखे के व्यापार में अर्जित की गई है, उसे प्रशासन को तत्काल अधिगृहित कर बेच देना चाहिए और उस राशि से मृतक एवं पीड़ित परिजनों को करोड़ों रुपए की सहायता राशि वितरित कर देनी चाहिए।

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