अस्पताल में भर्ती घायल महिला
अनोखा तीर, हरदा। शहर के बीचों बीच से गुजरे इन्दौर-बैतूल नेशनल हाइवे पर भारी वाहनों का दबाव जहां हादसों का संकेत देता रहा, वहीं इन सबके बीच शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होने से टल गया। दरअसल, एक युवक अपनी बहन को उसके घर से छोड़ने जा रहा है। युवक की मॉ भी बाईक से उनके साथ जा रही थी, तभी काली मंदिर के पास रायश्री बस क्रमांक एमपी-47-पी-०१८९ ने उसकी बाईक को टक् कर मार दी। जिससे बाईक युवक चालक समेत तीनों सड़क पर गिर गए। हादसे में बाईक सवार मॉ और बहन को गंभीर चोट आई है। हादसे के बाद युवक समेत अन्य लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान हाइवे पर तनातनी का माहौल बन गया। इतना ही नही, हाइवे पर तमाशबीन लोगों की भीड़ भी जुट गई। इस बीच मौके पर पहुंचे पुलिस जवान ने हालात पर बमुश्किल काबू पाया। वहीं दोनों घायल महिलाओं का इलाज के जिला अस्पताल भिजवाया। जहां महिला वार्ड में उनका इलाज जारी था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दीपक सातनकर बाईक से बहन सेवंती बाई पति गगन ढोके को उसके घर छोड़ने जा रहा है। साथ में दीपक की मॉ कांतिबाई पति राधेश्याम सातनकर भी बाईक पर सवार थीं। हादसे में सेवंती उम्र 30 साल एवं कांतिबाई उम्र 50 साल को हाथ एवं पैर सहित शरीर में चोट पहुंची हंै। वहीं लापरवाह चालक के विरूद्ध कार्रवाई कर रायश्री बस को थाना परिसर में खड़ा कराया है।
गुस्साएं लोगों ने कांच फोड़ा
हादसे के बाद गुस्साएं लोगों की नाराजगी देखने को मिली। परिणामस्वरूप हादसे को लेकर क्रोधित लोगों ने रायश्री बस का कांच फोड़ दिया। जिसके चलते मौके पर कुछ देर अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि, इस बीच वहां पहुंचे अतिरिक्त पुलिस बल ने संपूर्ण हालात को अपने नियंत्रण में ले लिया।
लोग बोले… विचारणीय मुद्दा
शुक्रवार शाम को इन्दौर रोड पर बस हादसे के बाद लोगों में नाराजगी दिखी। वहीं, वे बोल भी उठे कि ये मामला अब गहन विचार करने योग्य बन गया है। क्योंकि, यह शहर के सुगम एवं सुरक्षित यातायात से संबंधित है। जनमानस के मुताबिक बढ़ती आबादी को दृष्टिगत रखकर महत्वपूर्ण बदलाव की दरकार है या यूं कहें कि उन व्यवस्थाओं को बेहतर विस्तार देने का समय है, जो अब भी अपने पुराने ढर्रे पर गतिमान हैं। इनमें मुख्य रूप से शहरी क्षेत्र में बड़े वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण आवश्यक है। इसकी मुख्य वजह कई यात्री बसों को धंधे के लिहाज से अपने अगले स्टॉप पर तय समय पर पहुंचना जरूरी रहता है। ऐसी स्थिति में आबादी क्षेत्र से गुजरते वक्त रफ्तार की सुध नही रहती है। इसको लेकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के साथ साथ संबंधित विभाग को गंभीरता पूर्वक विचार कर उचित कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि हादसों की तमाम संभावनाओं पर विराम लगने के साथ ही यातायात व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त नजर आए।

