बूंदाबांदी का दौर जारी……  मौसम ने फिर तरेरी आंखें! बरसा रिमझिम पानी

क्षेत्र में बारिश की मौजूदगी बीें पांच दिनों से जस की तस है। आसमान में घने बादलों की वजह से कभी भी पानी बरसने के आसार हैं। इन सबके बीच शुक्रवार को मौसम के बार फिर अपनी आंखें तरेरी हैं। तड़के कहीं तेज तो कहीं हल्की बूंदाबांदी का दौर रहा। हालांकि, इसके कुछ घंटो बाद मौसम धीरे-धीरे साफ हुआ, वहीं धूप भी चिलचिलाने लगी। जिसके चलते देर शाम तक बूंदाबांदी थमी रही। परंतु रात्रि में घने बादल की उपस्थिति बनी रही, जो बारिश की आशंका को बल दे रहे थे।  

 

अनोखा तीर, हरदा। बीतें पांच दिनों से क्षेत्र में मौसम की बेरूखी बरकरार है। इस दौरान घने बादल के बीच रिमझिम तथा तेज बारिश का भी दौर निकल चुका है। इन सबके मध्य शुक्रवार तड़के जहां तेज पानी बरसा, वहीं घंटे दो घंटे बाद एक बार फिर बूंदाबांदी का दौर हुआ। इस दौरान आसमान में घने बादलों का डेरा था। साथ ही तेज हवा ने मौसम को सर्द कर दिया। हालांकि, इसके कुछ समय बाद मौसम धीरे-धीरे साफ हुआ, वहीं धूप भी निकल आई। जिससे लोगों को ठंडक से निजात रही। उधर, बेमौसम बारिश को लेकर किसानों ने कहा कि मौसम ने अचानक करवट बदली है। जिन किसानों की फसल परिपक्व यानी एक से डेढ़ माह की हो चुकी है, उन खेतों में बारिश से फिलहाल नुकसान नही है। परंतु जल भराव वाले खेतों में फसल पर विपरीत प्रभाव तय है। क्योंकि, फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रहना मतलब गड़बड़ है। उन्होंनें यह भी कहा कि ऐसे किसानों को चिंता लाजमी है। खासकर चना फसल की निरंतर निगरानी करनी पड़ेगी।

फिलहाल तो सबकुछ चंगा

इधर, मुख्यालय से लगे किसानों के मुताबिक रिमझिम बारिश फसलों के लिए लाभदायक साबित हुई है। पानी से छोटी-मोटी इल्ली बह चुकी है। इतना ही नही, प्राकृतिक पानी फसलों में टॉनिक का काम करने की उम्मीद है।। उन्होंनें यह भी स्पष्ट किया कि आगे चलकर मौसम की ऐसी बेरूखी फसलों के लिए खासकर चना फसल के लिए असहनीय हो सकती है। इसलिए मौसम की मेहरबानी नितांत जरूरी है। फिलहाल तो सबकुछ चंगा है।

अब छिड़काव करने की तैयारी

बता दें कि मौसम खुलने के साथ ही किसान अपने-अपने खेतों में खाद व दवा ड़िकाव की तैयारी में हैं। वे केवल बादल छटने तथा धूप खिलखिलाने की बांट जोह रहे हैं। जैसे ही उन्हें मौका मिला वे तुरंत खेतों में जुटेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश किसानों ने 1 से 20 नवम्बर के बीच फसलों की बुआई की है। जबकि चने का आधा रकबा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक बोया गया है।

जहां जलभराव, वहां हालात बेपटरी

 

यहां बताना होगा कि बेमौसम बारिश के कारण कहीं खुशी तो कहीं चिंता के हालात बने हैं। इसकी मुख्य वजह यह कि बीतें पांच दिनों से रह-रहकर कम ज्यादा पानी बरस रहा है। वहीं इस बीच घने बादलों का डेरा अपना एक अलग असर छोड़ रहे हैं। यह हम नही, बल्कि क्षेत्र के उन्नत एवं जागरूक युवा कृषक राम इनानिया ने कहा है। उन्होंनें प्रभावित रकबो की तस्वीर भी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा की है। साथ ही यह जिक्र किया कि बेमौसम बरसात फसलों की सेहत पर बुरा प्रभाव है। ऐसे वक्त पर कृषि वैज्ञानिकों की टीम को खेतों में जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। साथ ही किसानों को उचित सलाह भी अपेक्षित है। इसी संबंध में श्री इनानिया से चर्चा की तो उन्होंनें बताया कि ऐसे हालात में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बेमानी है। खासकर चना की फसल को लेकर यह मत है। उन्होंनें इस बात पर भी जोर दिया कि चने की फसल में अत्यधिक पानी के दुष्परिणाम तुरंत दिखाई नही देते हैं। खेतों में बतर आने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। ऐसा इसलिए , क्योंकि चने की फसल में न्यूनतम सिंचाईं होती है। विशेषकर काली मिट्टी वाले भारी खेतों में यह पद्धति अपनाते हैं। श्री इनानिया ने यह भी बताया कि छीपानेर बेल्ट यानी अबगांवखुर्द से लेकर दूर-दूर तक खेतों में चना दिखेगा। इस लिहाज से चने का रकबा आधे से ज्यादा है। नहर सिंचाईं से जुड़े किसानों ने भी चना पर भरोसा जताया है। उन्होंनें कहा कि चने के हितार्थ बारिश थमने की दरकार है।

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