अनोखा तीर, हरदा। यूं तो नई विधानसभा के चुनाव में अभी काफी देर बाकी है। मगर इसके पूर्व सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में कर्मचारियों ने एक बार फिर मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। इसके चलते आगामी जुलाई से बड़े आंदोलन की शुरूआत होने जा रही है। इसमें पुरानी पेंशन स्कीम, डीए समेत अन्य मुद्दे उठाए होंगे। प्रदेश अधिकारी संयुक्त मोर्चा ने 3 चरण में आंदोलन करने का ऐलान किया है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने सरकार पर अधिकारी, कर्मचारी एवं पेंशनरों की लंबित मांगों के प्रति उदासीनता का आरोप भी लगाया है। ज्ञात हो कि कई मांगें ऐसी भी हैं, जो सालों से लंबित है। मगर इसके बावजूद सरकार ध्यान नहीं दे रही। इसके चलते जुलाई से 3 चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश के 50 से ज्यादा कर्मचारी संगठन आंदोलन में शामिल होंगे। इसे लेकर तमाम बैठकें भी हो चुकी है।
इन मांगों पर होगा आंदोलन
कर्मचारी जिन मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं उनमें अधिकारी-कर्मचारी और पेंशनर्स को महंगाई भत्ता नहीं, महंगाई भत्ता का देय तिथि से एरियर का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 से पदोन्नति रूकी हुई है। इसके लिए प्रदेश सरकार कोई रूचि नहीं ले रही है। जिसके कारण हजारों अधिकारी एवं कर्मचारी पदोन्नति की बांट देखते-देखते सेवानिवृत्त हो रहे हैं। स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू नहीं किया जा रहा है। आवास भत्ते की दरें नहीं बढ़ाई जा रहीं हैं। अनेक संवर्गों में वेतन विसंगति है। लिपिकों की वेतन विसंगतियां दूर नहीं की जा रही। एनपीएस समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए। ग्रेड-पे में विसंगतियों का तुरंत निराकरण हो। शिक्षकों अध्यापकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दी जाए। निगम मंडलों में छठवां एवं पंचायत सचिवों को सातवां वेतनमान अभी तक नहीं दिया गया है। अनुकंपा नियुक्ति में सरलीकरण न किए जाने से हजारों आश्रित परिवार चक्कर लगा रहे हैं। नियमित शिक्षकों का पदनाम परिवर्तन नहीं हुआ। दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मचारी, स्थाई कर्मी, कोटवार, आउटसोर्सिंग कर्मचारी नियमित नहीं हुए। आशा एवं उषा कार्यकर्ता, जन स्वास्थ्य रक्षक की मांगों का कोई हल नहीं हुआ।
3 चरण में आंदोलन की तैयारी
कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि वे 3 चरण में आंदोलन करेंगे। इसमें आगामी 11 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में रैली निकाल मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 11 अगस्त को प्रदेश के सभी अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयों में सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। 10 सितंबर तक मांगें नहीं मानी गई तो भोपाल में प्रदेशव्यापी धरना देंगे। साथ ही बेमुद्दत आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
पटवारी संघ भी आंदोलन करेगा
मध्यप्रदेश पटवारी संघ भी आंदोलन करेगा। जून में ही आंदोलन होंगे। मंगलवार से रैली निकालने की शुरूआत होगी। वहीं मुख्यमंत्री को संबोधित स्मरण पत्र सभी जिलों में मंत्री, सांसद और विधायकों को दिए जाएंगे।
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