-युवालय के आरंभिक प्रशिक्षण में सीखे नेतृत्व, सहयोग और आत्मविश्वास के गुर
अनोखा तीर, हरदा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को सिनर्जी संस्थान के युवालय कार्यक्रम द्वारा हरदा केंद्र पर विशेष कार्यक्रम एवं आरंभिक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरदा जिले की 10 बस्तियों से जुड़े 110 युवाओं ने सहभागिता की। इस दौरान युवाओं ने आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिकता को आदिवासी नृत्य एवं गदली के माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विश्व आदिवासी दिवस क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास क्या है, इस विषय पर संक्षिप्त संबोधन भी हुआ। युवाओं को बताया गया कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस दुनिया भर के आदिवासी समुदायों की संस्कृति, पहचान, परंपराओं और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1994 में 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया था। विश्व आदिवासी दिवस के साथ आयोजित युवालय के आरंभिक प्रशिक्षण में युवाओं ने नेतृत्व, सहयोग, संवाद, आत्मविश्वास और संविधान के मूल्यों को गतिविधियों के माध्यम से समझा। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को युवालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उन्हें अपनी बात रखने, सवाल पूछने तथा अपने सपनों और क्षमताओं को पहचानने के लिए सुरक्षित एवं सहयोगी मंच उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि युवालय में हम बिना डर अपनी बात कह सकते हैं। यहां हमें सीखने, अपनी पहचान बनाने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। सिनर्जी संस्थान का युवालय कार्यक्रम युवाओं को सीखने, संवाद करने, नेतृत्व विकसित करने और समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के अवसर उपलब्ध करा रहा है। हरदा जिले की 10 बस्तियों के 110 युवाओं के साथ शुरू हुई यह यात्रा युवाओं के लिए नेतृत्व और सीखने की नई शुरुआत के रूप में सामने आई। कार्यक्रम के समापन पर युवाओं ने आदिवासी नृत्य एवं गदली के माध्यम से अपनी संस्कृति और सामूहिक एकता का संदेश दिया। आयोजन ने युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान के साथ-साथ आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना को मजबूत किया।





