Jabalpur Fire: Committee Inspected The Spot, Notice To Three Officers If One Floor Is Illegal – Jabalpur Fire: जांच कमेटी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, एक फ्लोर अवैध होने पर तीन अफसरों को नोटिस

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जबलपुर अस्पताल अग्निकांड में आठ व्यक्तियों की मौत की जांच के लिए गठित संभागायुक्त बी. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय कमेटी ने जांच प्रारंभ कर दी है। कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निगम की खामियां उजागर हुई हैं।

कमेटी के सदस्य संयुक्त संचालक स्वास्थ्य संजय मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल का प्रोविजनल फायर लायसेंस मार्च में समाप्त हो गया था, जिसका रिन्यूवल नहीं हुआ था। अस्पताल का संचालन ग्राउंड प्लस दो फलोर में हो रहा था। अस्पताल के पास अग्नि सुरक्षा के लिए चार यंत्र थे, नियमानुसार उनके पास आठ यंत्र होना था।

इसके अलावा नगर निगम के भवन विभाग ने बिल्डिंग में अस्पताल संचालित के लिए लायसेंस जारी किया थे। नियमानुसार अस्पताल में दो निकासी गेट होना चाहिए। गेट की चौड़ाई पांच फीट से कम नहीं होनी चाहिए। जिससे आपालकालिन स्थिति में मरीज को बेड सहित बाहर निकाला जा सके। अस्पताल में सिर्फ एक गेट था, जिसमें आगमन व निकासी दोनों होती थी।

इन सभी अनियमितताओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण कर अस्पताल संचालित करने के अनुमति प्रदान की है। अस्पताल संचालित करने के लिए जरूरी एनओसी व लायसेंस जारी करने में सभी संबंधित विभागों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। उन्होंने बताया कि शाम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच कमेटी के सदस्यों, आईजी, एसपी, निगमायुक्त सहित अधिकारी की बैठक लेकर जांच के संबंध में जानकारी प्राप्त की थी। इनके अलावा उन्होंने जरूरी दिशा-निर्देश जारी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देष दिए हैं। 

निगम आयुक्त आशीष बिष्ट ने बताया कि हॉस्पिटल की भवन निर्माण की अनुमति जी प्लस वन थी। अस्पताल प्रबंधन ने एक फ्लोर का अवैध निर्माण कर रखा था इस संबंध में भवन विभाग के तीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। प्रोविजनल फायर एनओसी 4 माह पूर्व समाप्त होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन पर उन्होंने कहा कि अस्पताल  संचालकों का दायित्व था कि 3 साल की फायर एनओसी के लिए आवेदन करें हमारे पास ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि फायर एनओसी नहीं लेने पर अस्पताल संचालन बंद कर सकें। 

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जबलपुर अस्पताल अग्निकांड में आठ व्यक्तियों की मौत की जांच के लिए गठित संभागायुक्त बी. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय कमेटी ने जांच प्रारंभ कर दी है। कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निगम की खामियां उजागर हुई हैं।

कमेटी के सदस्य संयुक्त संचालक स्वास्थ्य संजय मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल का प्रोविजनल फायर लायसेंस मार्च में समाप्त हो गया था, जिसका रिन्यूवल नहीं हुआ था। अस्पताल का संचालन ग्राउंड प्लस दो फलोर में हो रहा था। अस्पताल के पास अग्नि सुरक्षा के लिए चार यंत्र थे, नियमानुसार उनके पास आठ यंत्र होना था।

इसके अलावा नगर निगम के भवन विभाग ने बिल्डिंग में अस्पताल संचालित के लिए लायसेंस जारी किया थे। नियमानुसार अस्पताल में दो निकासी गेट होना चाहिए। गेट की चौड़ाई पांच फीट से कम नहीं होनी चाहिए। जिससे आपालकालिन स्थिति में मरीज को बेड सहित बाहर निकाला जा सके। अस्पताल में सिर्फ एक गेट था, जिसमें आगमन व निकासी दोनों होती थी।

इन सभी अनियमितताओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण कर अस्पताल संचालित करने के अनुमति प्रदान की है। अस्पताल संचालित करने के लिए जरूरी एनओसी व लायसेंस जारी करने में सभी संबंधित विभागों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। उन्होंने बताया कि शाम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच कमेटी के सदस्यों, आईजी, एसपी, निगमायुक्त सहित अधिकारी की बैठक लेकर जांच के संबंध में जानकारी प्राप्त की थी। इनके अलावा उन्होंने जरूरी दिशा-निर्देश जारी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देष दिए हैं। 

निगम आयुक्त आशीष बिष्ट ने बताया कि हॉस्पिटल की भवन निर्माण की अनुमति जी प्लस वन थी। अस्पताल प्रबंधन ने एक फ्लोर का अवैध निर्माण कर रखा था इस संबंध में भवन विभाग के तीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। प्रोविजनल फायर एनओसी 4 माह पूर्व समाप्त होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन पर उन्होंने कहा कि अस्पताल  संचालकों का दायित्व था कि 3 साल की फायर एनओसी के लिए आवेदन करें हमारे पास ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि फायर एनओसी नहीं लेने पर अस्पताल संचालन बंद कर सकें। 

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