दिगंबर जैन समाज का दस दिवसीय पर्युषण पर्व की शुरुआत  

अनोखा तीर, हरदा। दिगंबर जैन समाज का दस दिवसीय पर्युषण पर्व (दशलक्षण पर्व) बुधवार, 16 सितंबर से प्रारंभ होकर 25 सितंबर तक श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। पर्व के दौरान नगर के दिगंबर जैन मंदिरों एवं समाज के विभिन्न भवनों में प्रतिदिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समाजजनों से इन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पर्व का लाभ लेने का आह्वान किया गया है। यह जानकारी समाज के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने दी। जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन प्रात: 6 बजे ऊं अर्हम ध्यान योग प्रशिक्षिका अनिता दीदी (कोलकाता) के मार्गदर्शन में ध्यान योग क्लास होगी। प्रात: 7 बजे अभिषेक एवं दिव्य शांतिधारा, 8.30 बजे नित्यनियम पूजा एवं विधान पूजा प्रारंभ होगी। शाम 7 बजे आरती तथा रात्रि 8 से 9 बजे तक मंदिर में अनिता दीदी द्वारा प्रवचन होंगे। इसके बाद रात्रि 9 बजे आचार्य विद्यासागर भवन में अखिल भारतीय महिला परिषद/नवयुवक मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
दस दिनों में दस धर्मों का होगा गुणगान
पर्युषण पर्व के दस दिनों में जैन धर्म के दस उत्तम धर्मों पर शास्त्र वाचन एवं धार्मिक चिंतन होगा। पहले दिन उत्तम क्षमा, दूसरे दिन उत्तम मार्दव, तीसरे दिन उत्तम आर्जव, चौथे दिन उत्तम सत्य, पांचवें दिन उत्तम शौच, छठे दिन उत्तम संयम, सातवें दिन उत्तम तप, आठवें दिन उत्तम त्याग, नौवें दिन उत्तम आकिंचन्य तथा दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य पर प्रवचन एवं शास्त्र वाचन होंगे। कार्यक्रमों की शुरुआत बुधवार को पंचमी तिथि पर भक्तामर पाठ से हुई। 17 सितंबर को संत भवन में अनिता दीदी का विशेष कार्यक्रम, 18 सितंबर को बच्चों की विभिन्न आयु वर्गों में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, 19 सितंबर को दीपक द्वारा भक्तामर पाठ तथा 20 सितंबर को भजन प्रतियोगिता आयोजित होगी। 21 सितंबर को दशमी के अवसर पर धूप दशमी मनाई जाएगी। इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। 22 सितंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम, 23 सितंबर को धार्मिक तंबोला तथा 24 सितंबर को अनिता दीदी द्वारा विशेष कार्यक्रम होगा। 25 सितंबर को महाआरती एवं भक्तामर पाठ के साथ दस दिवसीय पर्व का समापन होगा।
अहिंसा और आत्मशुद्धि का संदेश देता है पर्व
पर्युषण पर्व जैन धर्म के आत्मशुद्धि, संयम, तप और क्षमा के संदेश को जीवन में उतारने का अवसर माना जाता है। भगवान महावीर के सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म:Ó तथा ‘जियो और जीने दोÓ की भावना को आत्मसात करने के साथ इस दौरान व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर आत्मावलोकन और आत्मसंयम की ओर बढ़ने का प्रयास करता है। राजीव जैन ने बताया कि पर्युषण के समापन के बाद 27 सितंबर को सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से समाजजन एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगेंगे और आपसी प्रेम, सद्भाव एवं मैत्री का संदेश देंगे।

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