-हसनपुरा-ढोलगांवकलां पंचायत सचिव की धार्मिक कथा में सक्रिय भूमिका पर उठे सवाल
-ड्यूटी से छुट्टी और अनुमति की होगी जांच
अनोखा तीर, खिरकिया। जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत हसनपुरा-ढोलगांवकलां में सचिव के पद पर पदस्थ एक सरकारी कर्मचारी इन दिनों एक धार्मिक आयोजन के पोस्टर को लेकर चर्चा में हैं। सामने आए पोस्टर में संबंधित कर्मचारी को ‘श्री सुरेश जी महाराज के रूप में कथावाचक बताया गया है। पोस्टर के अनुसार ग्राम सांंगवा माल में 1 से 5 सितंबर 2026 तक संगीतमय विशेष आध्यात्मिक पुराण कथा का आयोजन प्रस्तावित है, कथा शुरू भी हो चुकी है। मामला इसलिए गंभीर सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि पोस्टर में कथावाचक के रूप में प्रचारित व्यक्ति के संबंध में बताया जा रहा है कि वे ग्राम पंचायत हसनपुरा एवं ढोलगांवकला के सचिव एवं शासकीय कर्मचारी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी सेवा में रहते हुए वे धार्मिक आयोजनों में कथावाचक/’महाराज की भूमिका किस हैसियत से निभा रहे हैं और इसके लिए विभाग से विधिवत अनुमति ली गई है या नहीं? जबकि इसमें एक पंचायत ऐसी है जिसमें दो गांव और जुड़े हुए है।
जब चाहा छुट्टी लेकर ‘महाराज बनना कितना जायज
सरकारी कर्मचारी के लिए निजी अथवा सार्वजनिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर सेवा आचरण और अवकाश संबंधी नियम लागू होते हैं। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी अपनी सरकारी जिम्मेदारियों से अवकाश लेकर लगातार धार्मिक कथा-वाचन या अन्य व्यावसायिक/सार्वजनिक गतिविधि में सक्रिय रहता है, तो यह जांच का विषय बन सकता है कि अवकाश किस आधार पर स्वीकृत हुआ, क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई और उस अवधि में कर्मचारी की सरकारी ड्यूटी प्रभावित तो नहीं हुई। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राम पंचायत के सचिव के रूप में जिम्मेदार सरकारी पद संभालने वाले कर्मचारी को कथा-वाचन के लिए अनुमति किसने दी? यदि अनुमति ली गई है तो उसकी जानकारी सामने आना चाहिए और यदि बिना अनुमति ऐसा किया जा रहा है तो संबंधित विभाग को मामले की जांच करनी चाहिए।
पोस्टर में खुद को बताया ‘सुरेश महाराजÓ
सामने आए पोस्टर में आयोजन के लिए बड़े अक्षरों में ‘संगीतमय विशेष आध्यात्मिक पुराण कथाÓ का उल्लेख है। इसमें कथावाचक के तौर पर ‘श्री सुरेश जी महाराज (सांगवा माल, जि. हरदा)Ó लिखा गया है। पोस्टर में उनका मोबाइल नंबर भी प्रकाशित किया गया है। आयोजन स्थल श्री जागेश्वर धाम मंदिर प्रांगण, ग्राम सांगवा माल, तहसील खिरकिया, जिला हरदा बताया गया है।
सरकारी जिम्मेदारी या धार्मिक मंच—जवाब कौन देगा
ग्राम पंचायत सचिव का पद पंचायत के प्रशासनिक कामकाज से सीधे जुड़ा होता है। ग्रामीणों के प्रमाण-पत्र, पंचायत संबंधी कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन और शासन की विभिन्न गतिविधियों में सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में यदि सचिव लंबे समय तक कथा आयोजन में व्यस्त रहते हैं तो ग्राम पंचायत के नियमित कामकाज पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। अब मांग उठ रही है कि जनपद पंचायत खिरकिया एवं संबंधित पंचायत विभाग इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच करे और यह स्पष्ट करे कि संबंधित सचिव को कथा-वाचन के लिए कितने दिनों का अवकाश स्वीकृत हुआ है, किस अधिकारी ने अनुमति दी है तथा सरकारी सेवा के साथ इस प्रकार की गतिविधि के संबंध में क्या नियम लागू होते हैं। हालांकि, संबंधित कर्मचारी द्वारा नियमों के तहत पूर्व अनुमति ली गई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए विभागीय जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल
सरकारी पद पर बैठे कर्मचारी का ‘महाराज बनकर धार्मिक कथा करना नियमसम्मत है तो अनुमति सार्वजनिक हो, और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई कौन करेगा?
चार गोव के ग्रामवासी सचिव सेवा वंचित, ग्राम पंचायत के कार्य अधूरे
इस संबंध में जब ग्रामवासी से सम्पर्क किया गया तो ग्रामवासियों ने अपनी होने वाली असुविधाओ का दुखड़ा सुनाया, ना उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है ना ही ग्राम में कोई विकास कार्य हो रहे है, ग्राम में गन्दगी का अंबार लगा है, वही जिम्मेदारों ने सोखपीठ प्रणाली के नाम पर भारी खेला किया है, ग्राम पंचायत में आये दिनों ताला लटका रहता है, प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर सचिव सिर्फ आश्वासन देते है, स्वर्गवासी को मुक्तिधाम तक ले जाने वाले रास्ते पर कूड़े का ढेर ओर वहां जाने वाले रास्ते पर सड़क की जगह कीचड़ दिखाई पड़ रहा है गांव की स्थिति बदहाल है, ऐसी परिस्थिति में सचिव की कई दिनों तक अनुपस्थिति बड़े सवाल खड़े करती है। देखना होगा कि चार गांव की जिम्मेदारी दरकिनार करने वाले ऐसे जिम्मेदारों पर विभागीय अफसर आखिरकार क्या कार्यवाही करते है।
इनका कहना है..
सचिव के द्वारा कोई अनुमति नहीं ली गई है, इसे लेकर नोटिस जारी किया जाएगा, नोटिस का संतोषजनक जबाव अगर नहीं मिलता है तो सचिव पर कार्यवाही की जाएगी।
रीना कुमारिया, जनपद पंचायत सीईओ, खिरकिया।


