Skip to content
Saturday, 10 October 2026
हरदा

कृषि वैज्ञानिकों ने ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर सोयाबीन फसल का किया निरीक्षण  

2 min read
Anokhateer editorial default
Text Size:

-सोयाबीनउत्पादक किसानों को दी सलाह
अनोखा तीर, हरदा।  कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदा के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मुकेश बंकोलिया एवं रितेश बगोरा ने टिमरनी विकासखंड के विभिन्न ग्रामों रहटगांव, धनगांव, आलमपुर एवं सोडलपुर में सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सोयाबीन फसल में पीला मोजेक रोग के लक्षण पाए गए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि रोग के लक्षण दिखाई देते ही संक्रमित पौधों को खेत से उखाड़कर नष्ट करें, ताकि रोग का प्रसार रोका जा सके।  सफेद मक्खी नियंत्रण के लिए खेत में पीले स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई। रोग के वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु किसी एक कीटनाशक थायमेथॉक्साम 12.60 प्रतिशत + लेम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत जेडसी/ 50 मिली प्रति एकड़ अथवा बीटा सायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड/140 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करने की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि इन कीटनाशकों से तना मक्खी का भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।  निरीक्षण के दौरान सोयाबीन में जीवाणु स्फोट रोग के लक्षण भी पाए गए। इसके नियंत्रण हेतु कासुगामाइसिन 5 प्रतिशत + कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 45 प्रतिशत डब्ल्यू पी पूर्व-मिश्रित उत्पाद का 300 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई। किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई कि कीटनाशक, फफूंदनाशक एवं जीवाणुनाशक को आपस में मिलाकर एक साथ छिड़काव न करें। प्रत्येक रसायन का उपयोग उसके लेबल एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाए।  केंद्र प्रमुख डॉ.संध्या मुरे ने सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के दवाई डालने के पूर्व केंद्र में वैज्ञानिकों से संपर्क करें। अथवा वीडियो कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो भेज कर सलाह लें।

7 Views
What do you think?

Leave a Reply