-ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य और हरि-हर कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
अनोखा तीर, हरदा। चंदरसराफ की बाड़ी स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर समिति के अध्यक्ष बीपी तिवारी ने बताया कि मुख्य यजमान शशिभूषण जोशी द्वारा आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान में प्रतिदिन भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। छठे दिन व्यासपीठ से परम पूज्य पंडित श्याम सुंदर जोशी ने शिवपुराण में वर्णित परम पवित्र ज्योतिर्लिंगों और हरि-हर के सुंदर प्रसंगों की अमृत वर्षा की। कथा के छठे दिन पंडित जी ने हरि-हर (भगवान विष्णु और शिव) के एकाकार की दिव्य कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जब असुरों के अत्याचार से परेशान होकर भगवान विष्णु ने महादेव की घोर तपस्या की और उन्हें कमल के फूल अर्पित किए, तब एक फूल कम होने पर विष्णु जी ने अपना एक नेत्र महादेव के चरणों में चढ़ा दिया था। विष्णु जी की इस परम भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें महाविनाशक सुदर्शन चक्र प्रदान किया। इसके पश्चात पंडित जी ने त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे गौतम ऋषि पर लगे गौ-हत्या के झूठे कलंक को धोने के लिए माता अहिल्या और गौतम ऋषि ने ब्रह्मगिरि पर्वत पर कठिन तपस्या की। उनकी पुकार पर महादेव प्रकट हुए और वहां गंगा जी (गोदावरी) को प्रकट कर स्वयं ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हुए। आगे की कथा में घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की मर्मस्पर्शी कथा सुनाई गई। पंडित जी ने बताया कि परम शिव भक्त घुश्मा के पुत्र को उसकी ही बड़ी बहन ने इर्श्या वश तालाब में फेंक दिया था। घुश्मा ने पुत्र शोक में भी अपनी शिव भक्ति नहीं छोड़ी। जब वह रोज की तरह पार्थिव शिवलिंग विसर्जन करने तालाब पर गई, तो महादेव की कृपा से उसका पुत्र पुन: जीवित होकर बाहर आ गया। महादेव ने घुश्मा की भक्ति से प्रसन्न होकर वहां घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में वास किया। कथा के छठे दिन सर्व ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी और प्रबुद्धजन भी कथा श्रवण करने पहुंचे। इस अवसर पर सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष सुनील तिवारी, संरक्षक चंद्रकांत शुक्ला, उपाध्यक्ष रोहित तिवारी, मिडिया प्रभारी अखिलेश पाराशर, कोषाध्यक्ष गजानंद डाले, युवा कार्यकारिणी के कार्यकारी अध्यक्ष सुदीप मंडलोई, महिला कार्यकारिणी से सचिव अदिति गुरु एवं पूजा तिवारी मौजूद रहीं। इनके साथ अन्य समाज बंधु भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया।



