टोकन हाथ में, फिर भी खाद के लिए भटक रहा किसान

-डीएपी-यूरिया लेने पहुंचा तो दुकानदारों ने एक-दूसरे पर डाली जिम्मेदारी
-किसान बोला…दोनों खाद नहीं दे रहे

तरुण गौर, सिराली। सरकार की ई-टोकन व्यवस्था के बावजूद किसानों को खाद के लिए दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सिराली क्षेत्र के ग्राम पीपल्या निवासी किसान आशीष गौर का 20 अगस्त को उर्वरक के लिए ई-टोकन बुक हुआ। टोकन में किसान के लिए 2 बोरी डीएपी और 4 बोरी यूरिया दर्ज है, लेकिन टोकन होने के बावजूद किसान को खाद नहीं मिल पा रही है। किसान के अनुसार वह टोकन लेकर खाद लेने पहुंचा तो दोनों दुकानदारों की ओर से उसे पहले एक खाद उठाने के लिए कहा जा रहा है। किसान का आरोप है कि जब वह डीएपी लेने जाता है तो यूरिया की बात कही जाती है और यूरिया लेने पहुंचता है तो डीएपी को लेकर टालमटोल की जाती है। स्थिति यह है कि टोकन बुक होने के बाद भी किसान दोनों खाद के लिए भटक रहा है।
टोकन में बाकायदा दर्ज है खाद की मात्रा
किसान के पास उपलब्ध उर्वरक कूपन में उसकी 0.911 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है। इसमें मक्का फसल के लिए डीएपी 2 बोरी और यूरिया 4 बोरी का उल्लेख है। टोकन में 20 अगस्त 2026 को सुबह 10.42 बजे बुकिंग दर्ज दिखाई दे रही है। टोकन में सिराली की श्री गायत्री एग्रो एजेंसी और राजपूत कृषि सेवा को उर्वरक वितरण से संबंधित विक्रेता के रूप में दर्शाया गया है। इसके बावजूद किसान को खाद नहीं मिलना ई-टोकन व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है।
सरकार कहती है—पारदर्शी और समय पर होगा वितरण
मध्यप्रदेश कृषि विभाग की ई-विकास प्रणाली का उद्देश्य किसानों को समय पर और समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराना तथा वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विभाग ने स्वयं माना है कि उर्वरक वितरण में देरी और असमान वितरण जैसी चुनौतियां किसानों के सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसान के नाम पर टोकन जारी हो चुका है और उसमें खाद की मात्रा भी निर्धारित है, तो उसे खाद लेने के लिए दुकानों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?
एसडीओ के संज्ञान में मामला आते ही किसान को मिली 4 बोरी यूरिया
खाद के लिए किसान के भटकने की जानकारी कृषि विभाग खिरकिया के एसडीओ टीआर चौहान को मिली तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों संबंधित दुकानदारों से किसान को खाद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद राजपूत कृषि सेवा केंद्र, सिराली से किसान आशीष गौर को 4 बोरी यूरिया उपलब्ध कराया गया। यूरिया मिलने के बाद किसान ने राहत की सांस ली। हालांकि किसान के टोकन में दर्ज 2 बोरी डीएपी अभी नहीं मिल सकी है। किसान का कहना है कि डीएपी के लिए वह अभी भी इंतजार कर रहा है। इस संबंध में एसडीओ टीआर चौहान ने बताया कि गायत्री एग्रो के संचालक से संपर्क नहीं हो पाया है। किसान को डीएपी भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सकारात्मक पहल से मिली तत्काल राहत
मामले की जानकारी मिलते ही कृषि विभाग द्वारा तत्काल हस्तक्षेप किए जाने से किसान को कम से कम यूरिया के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। विभागीय अधिकारी के निर्देश पर उसी दिन 4 बोरी यूरिया उपलब्ध कराया गया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि शिकायत सामने आने के बाद समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप से किसान की समस्या का तत्काल समाधान संभव है।

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