पशुपतिनाथ मंदिर में शिव महापुराण का पांचवां दिन

-उपमन्यु, नारद जी और प्रभु राम-हनुमान प्राकट्य प्रसंगों से झूमे श्रद्धालु  

अनोखा तीर, हरदा। चंदरसराफ की बाड़ी स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मुख्य यजमान श्री शशिभूषण जोशी द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में परम पूज्य पंडित श्याम सुंदर जोशी ने व्यासपीठ से कई दिव्य और प्रेरणादायी प्रसंगों का संक्षिप्त व मर्मस्पर्शी वर्णन किया। कथा के पांचवें दिन पंडित जी ने बालक उपमन्यु की अटूट शिव भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे माता के कहने पर बालक उपमन्यु ने केवल जल पीकर भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और अमरता का वरदान देकर अपना पुत्र स्वीकार किया। इसके पश्चात पंडित जी ने महर्षि दधीचि और उनके पुत्र पिप्पलाद के दिव्य प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि लोक कल्याण के लिए महर्षि दधीचि के अस्थि दान करने के बाद, उनके पुत्र पिप्पलाद का जन्म हुआ। जब पिप्पलाद को पता चला कि उनके पिता की मृत्यु शनिदेव की दृष्टि के कारण हुई थी, तो उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर शनिदेव पर ब्रह्मास्त्र का प्रहार किया। अंत में देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनिदेव को इस शर्त पर क्षमा किया कि 16 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शनि कभी प्रताड़ित नहीं करेंगे। इसी प्रसंग से जोड़ते हुए व्यासपीठ से क्षीर सागर की उत्पत्ति की कथा सुनाई गई। पंडित जी ने बताया कि महादेव ने बालक उपमन्यु की भूख मिटाने और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पूरा क्षीर सागर ही प्रदान कर दिया था, जिससे ब्रह्मांड में दुग्ध महासागर की उत्पत्ति हुई। आगे की कथा में देवर्षि नारद जी द्वारा कामदेव पर विजय प्राप्त करने का प्रसंग सुनाया गया। पंडित जी ने बताया कि घोर तपस्या के बल पर नारद जी ने कामदेव को तो जीत लिया, लेकिन उनके मन में इसका अहंकार आ गया। इस अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया रची, जिसके बाद नारद जी का मोह भंग हुआ और वे पुन: भक्ति मार्ग पर लौटे। कथा के अंतिम चरण में प्रभु श्रीराम और संकटमोचन हनुमान जी के प्राकट्य के दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया गया। पंडित जी ने बताया कि भगवान शिव ही माता सीता की खोज में प्रभु राम की सहायता करने के लिए अपने ग्यारहवें रुद्र अवतार हनुमान जी के रूप में प्रकट हुए थे। इस प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल जय श्री राम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर समस्त कॉलोनी वासियों एवं नगर वासियों ने आरती में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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