
अनोखा तीर, हरदा। सावन मास के तीसरे सोमवार को शहर के गीता भवन में नन्हे कलाकारों ने भगवान भोलेनाथ का आकर्षक श्रृंगार किया। इस अवसर पर नर्मदा तट की मिट्टी से 1100 शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग और नागचंद्रेश्वर भगवान की प्रतिकृति बनाई गई। पंडित सर्वेश बिल्लोरे ने बताया कि छीपानेर रोड स्थित भगवान शिव के मंदिर में नन्हे कलाकारों ने नर्मदा तट से मिट्टी लाकर उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर खुलने वाले नागचंद्रेश्वर भगवान की प्रतिमूर्ति का निर्माण किया। कलाकार गणेशसिंह राजपूत, नितिन राजपूत, राघव, निहाल और गौरी बिल्लोरे ने तीन दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इन कलाकृतियों को आकार दिया। उन्होंने मिट्टी से 1100 शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग और 5100 रुद्री का निर्माण किया।
शिवलिंग निर्माण विरासत का हिस्सा
पंडित बिल्लोरे ने यह भी बताया कि सावन का महीना भगवान रुद्र को समर्पित है। पूरे सावन माह में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना गया है, जिनकी पूजा करने से जातक के सभी दुख दूर हो जाते हैं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। श्रद्धालु पूजा विश्वकर्मा कहना है कि सावन भगवान शिव की भक्ति और उपासना का विशेष महीना है। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक वातावरण बनता है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से शिवलिंग निर्माण और पूजन की परंपरा धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



