-खिरकिया में ‘हाईटेक हुआ अवैध कारोबार!
-मोबाइल और ऑनलाइन लेन-देन के सहारे नेटवर्क चलने की चर्चा
-पुराने चेहरे फिर सक्रिय होने के दावे
अनोखा तीर, हरदा। कभी गली-मोहल्लों में पर्चियों और नकदी के सहारे चलने वाला सट्टे का कथित कारोबार अब तकनीक की आड़ में नया रूप लेता नजर आ रहा है। खिरकिया नगर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक सट्टे के खेल की चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा है कि मोबाइल फोन और ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से इस अवैध कारोबार को पहले से ज्यादा व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब सट्टा खेलने वाले और कथित खाईवालों के बीच सीधा संपर्क कम हो गया है। मोबाइल पर नंबरों का खेल और ऑनलाइन पैसों का लेन-देन इस नेटवर्क का नया तरीका बताया जा रहा है। नकदी की आवाजाही कम होने से कारोबार करने वालों को पुलिस की नजर से बचने में आसानी होने की बात भी कही जा रही है।
पुराने खिलाड़ी फिर मैदान में?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पूर्व में सट्टा और खाईवाली के मामलों में नाम सामने आ चुके कुुछ लोग दोबारा सक्रिय हो गए हैं। इनके द्वारा नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में एजेंटों के माध्यम से नेटवर्क बढ़ाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मोबाइल बदला, खेल नहीं!
सट्टे के इस कथित कारोबार का तरीका भले बदल गया हो, लेकिन इसके सामाजिक नुकसान वही हैं। आसान कमाई के लालच में युवा और आम लोग आर्थिक नुकसान की चपेट में आ सकते हैं। सवाल यह है कि यदि नगर में इस तरह का नेटवर्क सक्रिय है तो इसकी भनक जिम्मेदार विभागों तक क्यों नहीं पहुंच रही? स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध कारोबार पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह नेटवर्क और पैर पसार सकता है। अब जरूरत सिर्फ पर्चियों की तलाश करने की नहीं, बल्कि मोबाइल के जरिए होने वाले संदिग्ध लेन-देन और पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की है।
पर्ची से मोबाइल तक पहुंचा सट्टे का खेल

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