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Sunday, 11 October 2026
हरदा

100 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जा हटाया

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गणेश पांडे, भोपाल। खंडवा जिले में जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने करीब 100 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमणकरियों से मुक्ति कराया। सूत्र ने बताया कि 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्र अभी भी अतिक्रमणकरियों के कब्जे में है। वन भूमि पर कब्जा हटाने की कार्रवाई जारी है। वन विभाग और आदिवासियों से टकराव की आशंका बनी हुई है। खंडवा जिले के गुड़ी रेंज के ग्रामीण क्षेत्र जिनमें नहार माल और हीरापुर जैसे गांवों में वन विभाग के एक बेश कीमती बड़े भूभाग पर वन अतिक्रमणकरियों ने कब्जा जमा रखा है। हालांकि यह कब्जा जमाने की शुरुआत सन 2020-21 से हुई थी। जो कि अब तक लगातार जारी था। करीब 4 साल पहले वन अतिक्रमणकरियों ने इस क्षेत्र के जंगलों को काटकर यहां समतल मैदान बना दिए थे। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अतिक्रमणकारी जंगल काटने के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने पेड़ों को काटकर उनके तने के अवशेषों को भी जला कर खत्म कर दिया था। जिसके बाद अब वहां मैदान नजर आने लगा था। इस बीच अतिक्रमणकरियों ने यहां सोयाबीन, मक्का और खरीफ की फसले तक बोई थी। जिनकी पैदावार भी अब लहलहाने लगी थी। हालांकि फसल काटने में अभी कुछ समय बाकी था और उस पर वन विभाग का बुलडोजर चल पड़ा।

कार्रवाई के दौरान 400 से अधिक का बल था मौजूद

खंडवा डीएफओ आरएस डामोर के मुताबिक यहां के लगातार जंगलों में अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने की तैयारी वन विभाग कर रहा था। हालांकि वन विभाग अपने स्तर से कई बार इन अतिक्रमणकरियों से वन भूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई कर चुका है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में बल उपलब्ध नहीं होने के चलते यह कार्रवाई काफी साबित नहीं हो रही थी। इसी के चलते सोमवार को खंडवा जिले के वन अमले के साथ ही बुरहानपुर जिले का वन अमला और पुलिस के करीब 100 जवान जिनमें महिला जवान भी शामिल थीं के साथ करीब कुल 400 से अधिक का जिला प्रशासन का अमला और प्रशासनिक अधिकारी वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने पहुंचे थे।

आदिवासियों से टकराव का था अंदेशा

इधर खंडवा डीएफओ राकेश डामोर का कहना था कि शासन स्तर पर सीड बॉल और तार फेंसिंग आदि को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था। जिसका बजट मंजूर हो चुका है। सरकारी तामझाम में कई राउंड गोलियां, आंसूगैस के गोले, कई बंदूकें भी बल अपने साथ ले गया था। वहीं मौके पर डीएफओ राकेश डामोर, एसडीएम बजरंग बहादुर, फॉरेस्ट एसडीओ संदीप वास्कले, तहसीलदार महेश सोलंकी की टीम भी मौजूद थी। बता दें कि ये अधिकारी इसलिए भी पहुंचे थे कि यदि किसी तरह का आदिवासियों से टकराव होता है, तो तुरंत सरकारी टीमें भी उन पर हमला कर सकती हैं। वहीं एसडीएम को गोली मारने के आदेश भी होते हैं। जिसका मतलब निकाला जा रहा है कि प्रशासन अपने पूरे तामझाम के साथ पहुंचा था। हालांकि इस तरह की स्थिति नहीं बनी।

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