विडंबना…. निर्देश बेअसर ! खुले में मांस का विक्रय जारी

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 प्रदेश की मोहन सरकार ने राज्य की बागड़ौर संभालने के साथ ही विकास कार्यो को गतिमान बनाए रखने का भरोसा दिलाया था, वहीं आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े सालों पुराने उन प्रयासों को रफ्तार प्रदान की जो अब तक महज खानापूर्ति में तब्दील रहे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने उन निर्देशों पर प्रभावी ढंग से अमल करने को पाबंद किया है। जिसका जमीनी स्तर पर असर भी दिखा। लेकिन, कुछ ही समय में मामला खानापूर्ति की चादर से लिपटता नजर आ रहा है। जी हॉ, हम बात कर रहे हैं खुले में मांस का विक्रय तथा उससे संबंधित नियमों के पालन की।  

 

अनोखा तीर, हरदा। जनस्वास्थ्य, सुरक्षित पेयजल तथा शुद्ध आवोहवा की दृष्टि से खुले में मांस का विक्रय घातक है। यही कारण है कि प्रदेश की मोहन सरकार ने शपथ लेने के बाद इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में रखा, वहीं इस दिशा में सख्ती के साथ व्यवस्था सुधार के निर्देश दिए हैं। जिसका जमीनी स्तर पर त्वरित असर भी दिखा, लेकिन उसके अपेक्षाकृत परिणाम नही मिले हैं। इसके पीछे क्या वजह रहीं ? यह तो प्रशासन के लिए विचारणीय है। यहां जनता केवल और केवल सरकार की मंशा और उसके परिपालन पर नजर गढ़ाये हैं। वे इन दो बिन्दूओं का आंकलन करने में जुटे हैं। यही कारण है कि सुस्त पड़ी कार्रवाई को लेकर तरह-तरह के कयास भी लगाए जाने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार खुले में मांस विक्री को लेकर सरकार के स्पष्ट रूख के बावजूद यहां कोई खास असर नही दिखा है। जिसके चलते स्वास्थ्य संस्थाओं के आसपास तथा गली-मोहल्लों में मांस की दुकानें अब भी चल रही हैं। जिसका अन्य लोगों पर बुरा असर पड़ना लाजमी है। यहां यह भी बताना होगा कि अलग-अलग नियमों के अंतर्गत खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने का नियम प्रदेश में कई सालों से लागू है। लोगों के जीवन से जुड़ा विषय होने के कारण सरकार सख्ती बरतने को बाध्य है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

नियम अंतर्गत स्लाटर हाउस जरूरी

सभी जिलों में नियमों के विपरीत चल रही दुकानों पर कार्रवाई कर रहे हैं। वहीं संबंधितों को नियमों का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। नियमों के मुताबिक ये सब काम केवल स्लाटर हाउस में होता है, लेकिन कई दुकानों पर इसका उलट देखने को मिलेगा। जिसके चलते पेयजल प्रदूषित होने का डर रहता है।

काले कांच का इस्तेमाल जरूरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार देशभर में वर्ष 2011 से लागू खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम अंतर्गत खाने की चीजों को खुला रखना गलत है। क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन करने से स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इसीलिए इन्हें ढंककर रखने के साथ साथ उसे काले कांच के अंदर रखना जरूरी है।

—-न्यूज इन बाक्स—-

स्वास्थ्य अधिकारी के भरोसे कार्रवाई

सरकार के आदेश के बावजूद नपा अमले की सक्रियता नगण्य है। जबकि इस दिशा में निरंतर कार्रवाई अपेक्षित है, जब तक नियमों का पालन सुनिश्चित ना हो। यही प्रदेश सरकार की मंशा है। मिली जानकारी के अनुसार मांस-मझली की अवैध दुकानों पर कार्रवाई का जिम्मा संबंधित क्षेत्र के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के पास है। उनके पास स्वच्छता समेत अन्य जिम्मेदारियां है। हालांकि, नियमित कामकाज के अतिरिक्त इस अभियान के लिए अमले की कमी है। जो कहीं ना कहीं कार्रवाई की रफ्तार धीमी कर रही है।

मांस विक्रय के ये नियम

– धार्मिक स्थल से 100 मीटर की दूरी।

– पर्याप्त वेंटिलेशन व दरवाजों में काला कांच।

– पुलिस व नगरीय निकाय की एनओसी।

– औजार स्टेनलेस स्टील के होना जरूरी।

– सब्जी समेत अन्य खाद्य दुकानों से दूरी।

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