अनोखा तीर बुरहानपुर। बुरहानपुर शहर की लगभग हर गली में मौजूद श्वानों की फौज रोजाना नागरिकों को घायल कर रही है। कुछ लोग अस्पताल पहुंच कर एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवा लेते हैं तो कुछ अंधविश्वास में पड़ कर जान गवां देते हैं। एक ऐसा ही मामला शहर के बुधवारा क्षेत्र का सामने आया है।
जिसमें इंजेक्शन के डर और अंधविश्वास ने दसवीं कक्षा के एक 15 वर्षीय छात्र की जान ले ली। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले माधव प्रजापति के पुत्र विशाल को करीब सात माह पूर्व मोहल्ले के एक श्वान ने कमर के पास काट लिया था। दोस्तों ने उसे बताया कि अब चौदह इंजेक्शन लगवाने पड़ेंगे।
इस डर से उसने तीन दिन तक घटना को स्वजन से छिपाए रखा। बाद में पता चला तो स्वजन उसे एक बाबा के पास झाड़ फूंक कराने ले गए। बाबा ने दावा किया था कि इससे श्वान का जहर उतर जाएगा और बच्चे को कुछ नहीं होगा।
बीती छह जनवरी को अचानक विशाल पानी से डरने लगा और उसकी हालत बिगड़ गई। आखिरकार देर रात उसने दम तोड़ दिया। विशाल के पिता माधव प्रजापति ने शहर के लोगों से अपील की है कि वे बाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपने प्रियजन को न खोएं। श्वान के काटने पर इलाज कराएं।
डाक्टरों ने भी कह दिया था सब ठीक है
माधव प्रजापति ने बताया कि बाबा के पास जाने से पहले वे बच्चे को मोहल्ले के एक डाक्टर के पास भी ले गए थे। घाव देखने के बाद उसने भी कह दिया था सब ठीक है। इसके बाद वे रिश्तेदारों के कहने पर बाबा के चक्कर में फंसे थे। उन्होंने बताया कि विशाल पढ़ने में होशियार था।
बस स्टैंड के पास स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ता था। खाली समय में वह पारंपरिक व्यवसाय में हाथ भी बंटाता था। माधव पांच भाई हैं और पूरा परिवार अब भी एकसाथ रहता है। उनके परिवार में बारह बच्चे हैं, जिनमें विशाल सबसे बड़ा था। माधव का छोटा भाई नरेंद्र कुमार आर्मी में हवलदार है।
सालभर में एक हजार से ज्यादा घटनाएं हो रहीं
श्वानों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। औसतन सालभर में एक हजार से ज्यादा घटनाएं होती हैं। इनका सबसे ज्यादा छोटे बच्चे शिकार होते हैं। इन घटनाओं को देखते हुए कई बार श्वानों को पकड़ कर शहर से बाहर छोड़ने और उनकी संख्या में कमी लाने बधिया करण कराने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक नगर निगम ने कोई प्रयास नहीं किए हैं।

