अनोखा तीर, हरदा। शासकीय शिक्षक संगठन जिला हरदा ने शिक्षक पात्रता परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को सौंपा। शिक्षक पात्रता परीक्षा का आदेश जारी होते ही पूरे प्रदेश में इसका विरोध शुरू हो गया है। इसी क्रम में शासकीय शिक्षक संगठन जिला इकाई हरदा ने जिलाध्यक्ष मजीद खान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को सौंपा। साथ ही स्थानीय समस्याओं को लेकर भी कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में टिमरनी विकासखंड एवं हरदा विकासखंड में प्राथमिक शिक्षकों का फरवरी माह 2026 का वेतन नहीं होने की समस्या उठाते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की गई। हरदा विकासखंड में 141 शिक्षकों के वेतन से की गई कटौती की राशि आज तक शिक्षकों के खातों में जमा नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया तथा उसे शीघ्र जमा कराने का निवेदन किया गया। इसके अलावा जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 12 वर्ष एवं 24 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उन्हें नियमानुसार क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ प्रदान करने की मांग की गई। संगठन ने ई-अटेंडेंस के कारण रुके हुए शिक्षकों का वेतन भुगतान, बाजनिया संकुल के डीए के एरियर्स का भुगतान, नवीन शिक्षक संवर्ग की परीक्षा अवधि पूर्ण होने पर 100 प्रतिशत वेतन भुगतान तथा दिव्यांग शिक्षकों के विकलांग भत्ते के भुगतान की मांग भी ज्ञापन में की है। संगठन के प्रांतीय महामंत्री अशोक देवराले ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी राजपत्र तथा उस समय प्रभावी नियमों के आधार पर विधिवत रूप से की गई थी। ऐसे में बाद में शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर देना तथा दो वर्ष के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने की स्थिति में सेवा समाप्ति जैसा कठोर प्रावधान लागू करना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक वर्षों से निष्ठा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित करते हुए शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में दीर्घकाल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा को केवल पात्रता परीक्षा के आधार पर समाप्त करने का प्रावधान उनके भविष्य को असुरक्षित बनाता है तथा उनके परिवारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मध्य प्रदेश सरकार इस विषय में संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर कर शिक्षकों का पक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करे तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने या पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को इससे पूर्ण रूप से मुक्त करने के संबंध में सकारात्मक निर्णय ले। ज्ञापन के दौरान राज्य शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संघ, शिक्षक कांग्रेस, शिक्षक संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और प्रांतीय शिक्षक संघ के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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