विश्व पर्यावरण दिवस पर मसनगांव में हुआ सरोकारी सम्मेलन
अनोखा तीर, मसनगांव। हम धरती माता तो मानते हैं, लेकिन उसके संरक्षण की दिशा में कोई पहल नहीं करते। प्रकृति ने हमें हवा, पानी, प्रकाश, मिट्टी सब कुछ दिया है और मुफ्त दिया है। हमने इसके दोहन की जगह शोषण करना शुरु कर दिया है। अक्सर सार्वजनिक आयोजनों में भारत माता का जयकारा तो जोरशोर से लगाते हैं, लेकिन हम भूल जाते हैं कि जिसकी जय-जयकार कर रहे हैं, हम उसके लिए कितने समर्पित हैं। भारत माता एक जमीन का टुकड़ा नहीं अपितु जलचर, थलचर सब उसमें समाहित हैं। हमनें जल, जमीन और हवा सबको प्रदूषित करने का कार्य किया है। आज पर्यावरण संरक्षण के बगैर स्वस्थ्य मानव जीवन की कल्पना निरर्थक है। उक्त आशय के विचार आज मसनगांव में आयोजित सरोकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय सांसद एवं भारत सरकार के आदिम जाति कल्याण राज्य मंत्री डीडी उईके ने व्यक्त किए। अमृत वन संरक्षण फाउंडेशन के बैनरतले पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री उईके ने जन्म से लेकर मृत्यु तक लकड़ी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा घटते भू-जल स्तर को दृष्टिगत रखते हुए जल गंगा संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी एक पेड़ मां के नाम अभियान का आह्वान हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है। यह सभी अभियान तभी सार्थक होंगे जब इसमें जन भावना और जन भागीदारी शामिल होगी। श्री उईके विद्युत के धन-ऋण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह विद्युत उपकरण संचालन के लिए इन दोनो का होना आवश्यक है, इसी तरह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रकृति से आदान-प्रदान भी आवश्यक है। अगर हम केवल प्रकृति का दोहन या शोषण ही करते रहे तो एक दिन यह प्राकृतिक खजाना समाप्त हो जाएगा। जिस तरह आज कुए और नदियों का पानी सूख गया है। वन निरंतर घटते जा रहे हैं। पर्यावरण प्रदृषित होता जा रहा है, अगर हमने प्रयास नहीं किया तो आने वाला समय पृथ्वी पर जीव मात्र के लिए संकटकारी होगा। श्री उईके ने अनेक दृष्टांतों के साथ आध्यात्मिक भाषा शैली में अपनी बात रखी। इस अवसर पर पूर्व मंत्री कमल पटेल, हरदा विधायक डॉ.रामकिशोर दोगने, जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह ने भी पर्यावरण संरक्षण को रेखांकित करते हुए अपने सारगर्भित उदबोधन दिए। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजन के उद्देश्य को लेकर पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाति ने विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में हमने मसनगांव में गांव के निस्तारी पानी को प्राकृतिक पद्धति से शुद्ध करते हुए नदी में जाने की कार्ययोजना बनाई है। जिसका आज लोकार्पण किया जा रहा है। वहीं वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान की अवधारणा को पूरा करने की दिशा में भी हमारे द्वारा बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। मसनगांव के किसानों ने इसमें भी अग्रणी भूमिका निभाई है। आयोजन में निर्धारित विषयों पर केंद्रित वक्ताओं द्वारा खानपान, पर्यावरण एवं जल आदि विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

शक्कर, नमक, गेहूं खाओगे तो अस्पताल जाओगे : डॉ.विशाल बघेल
मोटे अनाज एवं स्वस्थ मानव जीवन विषय को केंद्रित करते हुए डॉ.विशाल बघेल ने कहा कि जिस तरह हमारे द्वारा कीटनाशकों का प्रयोग करते हुए खाद्यान उत्पादन किए जा रहे हैं, वह हमारी सेहत के लिए सर्वाधिक हानिकारक है। हमारे पूर्वजों द्वारा जिस अनाज का उपयोग पहले खाने-पीने में किया जाता था, हम उसे छोड़कर विदेशी उत्पादों को अपनाने लगे। हमने विदेशों से न केवल गेहूं, चावल, शक्कर जैसे उत्पाद आयात किए, बल्कि उसके साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी घातक बीमारियां भी आयात कर ली हैं। आज हम देखते हैं कि हमारे यहां युवा लोग ब्लड प्रेशर और शुगर से पीड़ित आते हैं। उन्होंने कहा कि हमने स्वयं अपने घर पर गेहूं का इस्तेमाल न्यूनतम कर दिया है और मोटे अनाज का उपयोग शुरु कर दिया है। हम सफेद नमक और सफेद शक्कर का बिल्कुल भी सेवन नहीं करते। अगर आप लोग गेहूं, चावल, सफेद नमक और सफेद शक्कर का सर्वाधिक उपयोग करेंगे तो अस्पताल अवश्य जाना पड़ेगा। स्वस्थ रहना है तो मोटा अनाज अपनाना होगा।
छोटे-छोटे कदमों से आता है बड़ा बदलाव : अग्रवाल
दिल्ली से आए अतुल अग्रवाल जल की महत्ता और पर्यावरण दिवस मनाने की आवश्यकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को लेकर आज पूरी दुनिया परेशान है। यही कारण है कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा। लेकिन एक दिन यह दिवस मनाने भर से पर्यावरण संरक्षण नहीं होगा, इसके लिए हमें सामूहिक प्रयास करना होगा। आज हमारा भू-जल स्तर निरंतर गहराता जा रहा है। कल-कल बहने वाली नदियां केवल मौसमी बनकर रह गई हैं। कुएं, बावड़ी, तालाब अब जलविहीन होकर अप्रासंगिक हो गए हैं। अभी भी अगर हम जागृत नहीं हुए तो भविष्य जल और जलवायु के कारण गंभीर संकट में आ जाएगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
तेजी से घट रहे दुनियां में वन : डॉ.शहगल
द-नेचर कंजरवेंसी नई दिल्ली के एग्जीकेटिव डायरेक्टर डॉ.सुशील शहगल ने कहा कि आज दुनिया में तेजी से वनो का क्षेत्रफल घट रहा है। बीते ४०-५० वर्षों में जिस तेजी के साथ प्राकृतिक वन घटे हैं, वह आज पूरी दुनिया के चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि हमने प्राकृतिक वनों को काटकर गमलो में पौधा उगाना शुरु कर दिया है। आज स्थिति यह है कि पर्यावरण को लेकर ग्लोबल वार्मिंग सम्मेलनों का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए जाने लगे हैं। इस भीषण दौर में भी हमारे लिए संतोष का विषय यह है कि विश्व के सर्वाधिक वन अच्छादित १० देशों में भारत शामिल है, लेकिन जिस तेजी के साथ वनो का विदोहन हो रहा है उसे देखते हुए हम इस सूची में लंबे समय बने रहेंगे यह कहना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में अधिकाधिक वृक्षारोपण और भू-जल संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास वक्त की आवश्यकता है। डॉ.शहगल ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शासकीय एवं गैर शासकीय रूप से किए जाने वाले विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने तकनीकी रूप से इस विषय को रेखांकित किया।
गांव को गौरवांवित करने वालों के परिजनों का सम्मान
आज पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाति ने अपने पैतृक गांव मसनगांव के उन गौरव पुरुषों को ताम्रपत्र पर अंकित किया, जिन्होंने गांव को गौरवांवित किया था। अपने निज निवास पर स्थित अतिथि सत्कार गृह में गांव के ऐसे २० लोगों की ताम्रपत्र पट्टिका बनाकर लगाई है, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम तथा समाज में अपना विशेष योगदान दिया था। इन गौरव पुरुषों के परिजनों से ही इन पट्टिकाओं को प्रदर्शित कराया। उल्लेखनीय है कि मसनगांव के ११ लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम सैनानी का दर्जा प्राप्त हुआ। वहीं शिक्षा और परिश्रम की पराकाष्ठा करने वाले ९ अन्य प्रेरणा पुरुषों के परिजनों सहित आज ऐसी २० हस्तियों को नमन करते हुए उनके परिवारों को शाल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन ज्ञानेश चौबे ने किया। इस समूचे आयोजन में दैनिक अनोखा तीर के संपादक प्रहलाद शर्मा, सरपंच संघ जिलाध्यक्ष ललित पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दर्शनसिंह गहलोत, संजय तेंगुरिया, संजय चौधरी, कैलाश शर्मा सहित गुजरात, भोपाल, नर्मदापुरम, हरसूद, सिवनी, भैरुंदा से अनेक लोग शामिल हुए।



